BY
Yoganand Shrivastava
Lucknow : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ आज राजनीतिक अखाड़ा बन गई। मनरेगा और राज्य की गिरती कानून व्यवस्था के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विधानसभा का घेराव करने की कोशिश की। इस विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए प्रशासन ने पहले ही कई दिग्गज कांग्रेस नेताओं को उनके आवास पर नजरबंद कर दिया, जिसके बाद सड़कों पर उतरे कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच जमकर तीखी नोकझोंक और खींचतान देखने को मिली।
बैरिकेडिंग पर टकराव: पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच ‘तू-तू मैं-मैं’
Lucknow प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के आह्वान पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता विधानसभा कूच के लिए इकट्ठा हुए थे। जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा की ओर बढ़ना शुरू किया, भारी पुलिस बल ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक लिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा, जिससे इलाके में काफी समय तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
सरकार पर बरसे दिग्गज: “लोकतंत्र में आवाज दबाने की कोशिश”
Lucknow नजरबंदी और पुलिसिया कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि सरकार बैरिकेडिंग और डंडे के जोर पर हुकूमत चलाना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के पास न नौकरी है और न ही परीक्षाएं निष्पक्ष हो रही हैं, बस चारों ओर डर का माहौल है। वहीं, आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने मनरेगा और गांधी जी के आदर्शों की अनदेखी को लेकर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए और इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: छावनी में तब्दील हुई राजधानी
Lucknow कांग्रेस के इस बड़े प्रदर्शन को देखते हुए लखनऊ प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। विधानसभा के आसपास के रास्तों को सील कर दिया गया था और चप्पे-चप्पे पर पीएसी (PAC) व पुलिस बल की तैनाती की गई थी। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि सरकार प्रदर्शन से इतनी डरी हुई है कि उसने लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार को भी छीन लिया है। फिलहाल, कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है और इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।
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