रिपोर्टर:- ऋषभ कुमार
Nawada बिहार के नवादा जिले में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लागू करने के समर्थन में छात्र संघ और युवाओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। भारी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे और प्रशासन से मांग की कि उच्च शिक्षा में सुधार के लिए इन नियमों को अविलंब प्रभावी बनाया जाए।
पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हित में बताया नया नियम
Nawada प्रदर्शनकारी छात्रों का तर्क है कि यूजीसी के नए दिशा-निर्देश दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करेंगे। छात्र संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि इन नियमों से शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता आएगी और वंचित वर्गों के छात्रों को मुख्यधारा में समान अवसर प्राप्त होंगे। उनके अनुसार, यह नियम शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
‘काला कानून’ बताने वालों पर निशाना
Nawada आंदोलन के दौरान छात्रों ने उन वर्गों की कड़ी आलोचना की जो इन नए नियमों का विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कुछ लोग जानबूझकर इन सुधारों को ‘काला कानून’ कहकर भ्रम फैला रहे हैं, ताकि शिक्षा व्यवस्था पर उनका वर्चस्व बना रहे। छात्रों ने स्पष्ट रूप से कहा कि विरोध करने वाले वर्ग वास्तव में पिछड़ों की प्रगति में बाधा उत्पन्न करना चाहते हैं।
जातिवाद के खिलाफ नारेबाजी और कड़ा रुख
Nawada नवादा की सड़कों पर प्रदर्शन के दौरान “यूजीसी नियम लागू करो” और “जातिवाद मुर्दाबाद” जैसे नारों से माहौल पूरी तरह गरमाया रहा। युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों को अनसुना किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और भी तेज करेंगे। प्रदर्शन के चलते शहर की यातायात व्यवस्था कुछ समय के लिए प्रभावित रही, लेकिन छात्रों का संकल्प अपनी मांगों को लेकर अडिग दिखा।





