Cinema : इजराइल में जन्मी वह अभिनेत्री, जिसने दिलीप कुमार संग किया डेब्यू और बनी बॉलीवुड की सबसे चर्चित ‘वैम्प’

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Cinema हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में जहाँ अभिनेत्रियां अक्सर शर्मीले और घरेलू किरदारों में नजर आती थीं, वहीं एक ऐसी अदाकारा भी थीं जिन्होंने अपनी तीखी नजरों और बेबाक अंदाज से ‘बोल्डनेस’ की नई परिभाषा लिखी। हम बात कर रहे हैं ‘मुड़ मुड़ के न देख’ गर्ल के नाम से मशहूर अभिनेत्री नादिरा की। इजराइल के एक यहूदी परिवार में जन्मी नादिरा ने अपनी पहली ही फिल्म से यह साबित कर दिया था कि वह लंबी रेस का घोड़ा हैं।

बदहाली से बुंलदी तक का सफर: इजराइल से मुंबई का रुख

Cinema नादिरा का जन्म 5 सितंबर 1932 को इजराइल में हुआ था और उनका असली नाम फ्लोरेंस एजेकेल था। उनका बचपन बेहद संघर्षों में बीता। आर्थिक तंगी के कारण उनका परिवार भारत आ गया और मुंबई में रहने लगा। घर के हालात इतने खराब थे कि कभी-कभी खाने तक के लाले पड़ जाते थे। ऐसे में परिवार की मदद के लिए नादिरा ने छोटी उम्र में ही काम ढूंढना शुरू किया। उनकी किस्मत तब बदली जब निर्देशक महबूब खान की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने नादिरा को अपनी भव्य फिल्म ‘आन’ (1952) में एक जिद्दी राजकुमारी के रोल के लिए चुन लिया।

राज कपूर की फिल्म और ‘मुड़ मुड़ के न देख’ का जादू

Cinema पहली ही फिल्म में दिलीप कुमार जैसे दिग्गज अभिनेता के साथ काम कर नादिरा रातोंरात स्टार बन गईं। लेकिन उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट राज कपूर की फिल्म ‘श्री 420’ रही। इस फिल्म में उन्होंने ‘माया’ नाम की एक ऐसी महिला का किरदार निभाया जो नायक को गलत राह पर ले जाती है। इस फिल्म का गाना ‘मुड़ मुड़ के न देख’ जबरदस्त हिट हुआ और नादिरा को बॉलीवुड की सबसे ग्लैमरस वैम्प के रूप में पहचान मिली। उन्होंने अपने करियर में करीब 60 फिल्मों में काम किया और ज्यादातर नकारात्मक या ग्रे-शेड्स वाले किरदारों को पूरी शिद्दत से जिया।

रॉयल्स रॉयस की सवारी और आखिरी दिनों का अकेलापन

Cinema 50 और 60 के दशक में नादिरा की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि वह उस दौर की सबसे महंगी अभिनेत्रियों में गिनी जाती थीं। उनके ठाठ-बाट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह फिल्म इंडस्ट्री की उन चुनिंदा हस्तियों में शामिल थीं जिनके पास अपनी रोल्स रॉयस कार थी। नादिरा अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल और साहस के लिए जानी जाती थीं। हालांकि, सफलता के शिखर को छूने वाली इस अदाकारा के जीवन का अंतिम पड़ाव काफी शांत और अकेला रहा। आज उनकी पुण्यतिथि पर सिनेमा जगत उनकी उस बेमिसाल अदायगी को याद करता है, जिसने विलेन के किरदारों को भी सम्मानित बनाया।

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