Report: Somnath mishra
Jabalpur मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने छतरपुर जिले में हुए एक बड़े खनन घोटाले से जुड़ी जनहित याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन और मेसर्स किसान मिनरल्स सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर करीब 30,000 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई है।
छतरपुर के दो गांवों में अवैध उत्खनन का आरोप
Jabalpur याचिका के अनुसार, छतरपुर जिले के मड़वा और सिलपतपुरा गांवों में साल 2007 से ही बड़े पैमाने पर अंधाधुंध खनन किया जा रहा है। मेसर्स किसान मिनरल्स पर आरोप है कि उसने बिना किसी उचित रॉयल्टी या विकास शुल्क का भुगतान किए खनिज संपदा का दोहन किया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस गतिविधि से सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुँचाया गया है।
शेल कंपनियों और त्वरित अनुमतियों का खेल
Jabalpur इस मामले में एक गंभीर आरोप 8 से 10 फर्जी (शेल) कंपनियां बनाकर वित्तीय अनियमितताएं करने का भी है। याचिका में इस बात पर भी हैरानी जताई गई है कि कैसे संबंधित खनिज कारोबारी को एक ही दिन के भीतर कई अलग-अलग सरकारी विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र और स्वीकृतियां मिल गईं। यह पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करती है।
पूर्व की जांच और कोर्ट की आगामी कार्यवाही
Jabalpur याचिका में उल्लेख किया गया है कि पूर्व में कई बार जांच होने के बावजूद शासन को देय रॉयल्टी की वसूली नहीं की गई। शासन की इस कथित शिथिलता को देखते हुए अब न्यायालय ने हस्तक्षेप किया है। हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का समय दिया है और इस मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की गई है।
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