BY
Yoganand Shrivastava
कुत्तों के काटने से होने वाली मौत और चोट के लिए जिम्मेदार तय करने के संकेत
Dehli: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के काटने से होने वाली मौत और चोट के मामलों पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की घटनाओं के लिए राज्य सरकार, स्थानीय अधिकारी और कुत्ते पालने वाले संगठन जिम्मेदार होंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि डॉग बाइट के मामलों में भारी मुआवजा देना राज्य की जिम्मेदारी होगी और कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर खुला छोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

तीखे सवाल, इंसानों की सुरक्षा पर जोर
Dehli: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कुत्तों को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि क्या भावनाएं केवल कुत्तों के लिए हैं और इंसानों के लिए नहीं? यदि आवारा कुत्तों द्वारा कोई बच्चा या नागरिक घायल हो जाता है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी? कोर्ट ने डॉग फीडर्स और कुत्ते पालने वाले संगठनों की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।

सख्त नियम और कानूनी दिशानिर्देशों की जरूरत
Dehli: सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिए गए 7 नवंबर के आदेश का समर्थन किया, जिसमें शिक्षण संस्थान, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने और उन्हें डॉग शेल्टर भेजने का निर्देश था। कोर्ट ने कहा कि कुत्तों के खुले घूमने और उपद्रव मचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने डॉग बाइट से जुड़ी घटनाओं में कानूनी कार्रवाई और मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी और संबंधित संगठन जिम्मेदार होंगे।
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