Iran-Israel: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हालिया संघर्ष के बाद क्षेत्र में तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा हो चुकी है, लेकिन राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर बयानबाजी लगातार जारी है। इसी बीच इजरायल की ओर से किया गया एक दावा नए विवाद का कारण बन गया है।
इजरायल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान गुप्त रूप से संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE की यात्रा की थी। इस दावे के सामने आने के बाद क्षेत्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई। हालांकि, UAE ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इस दावे को पूरी तरह गलत बताया है।
Iran-Israel: मिडिल ईस्ट में संघर्ष के बाद बढ़ा तनाव
हाल के दिनों में ईरान और इजरायल के बीच टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया को प्रभावित किया। संघर्ष के दौरान ईरान ने UAE समेत खाड़ी क्षेत्र के कई देशों की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे। इसके बाद अमेरिका की मध्यस्थता से ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर की घोषणा हुई, लेकिन हालात अब भी संवेदनशील बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष ने खाड़ी देशों की सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
Iran-Israel: इजरायल ने क्या दावा किया?
इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से बुधवार रात जारी बयान में कहा गया कि “ऑपरेशन रोरिंग लायन” के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुप्त रूप से UAE का दौरा किया था। बयान के अनुसार, इस यात्रा के दौरान नेतन्याहू ने UAE के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan से मुलाकात की।
इजरायली बयान में यह भी कहा गया कि यह दौरा दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हुआ और इससे द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा मिली।
Iran-Israel: UAE ने दावे को बताया निराधार
इजरायल के दावे के कुछ समय बाद ही UAE के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर इसे सिरे से खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि देश में इजरायली प्रधानमंत्री या किसी सैन्य प्रतिनिधिमंडल की गुप्त यात्रा से जुड़ी खबरें पूरी तरह गलत हैं।
यूएई ने स्पष्ट किया कि इजरायल के साथ उसके संबंध सार्वजनिक और आधिकारिक हैं तथा वे अब्राहम समझौते के तहत संचालित होते हैं। मंत्रालय ने कहा कि यूएई किसी भी प्रकार के अपारदर्शी या अनौपचारिक समझौतों का हिस्सा नहीं है।
Iran-Israel: अब्राहम समझौते का भी किया जिक्र
UAE ने अपने बयान में कहा कि इजरायल के साथ संबंधों को लेकर सभी गतिविधियां आधिकारिक प्रक्रिया के तहत होती हैं। मंत्रालय ने कहा कि जब तक संबंधित अधिकारी किसी यात्रा या बैठक की औपचारिक पुष्टि नहीं करते, तब तक इस तरह के दावे आधारहीन माने जाएंगे।
यूएई ने यह भी कहा कि किसी भी अघोषित यात्रा या गुप्त समझौते से संबंधित खबरों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।
Iran-Israel: मीडिया संस्थानों से भी की अपील
यूएई विदेश मंत्रालय ने मीडिया संगठनों से अपुष्ट खबरों को प्रसारित करने से बचने की अपील की। मंत्रालय ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रीय परिस्थितियों में सटीक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग बेहद जरूरी है।
साथ ही यह भी कहा गया कि राजनीतिक बयानबाजी को बिना पुष्टि के प्रसारित करने से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।
Iran-Israel: क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
विशेषज्ञों के अनुसार, इजरायल और UAE के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुए हैं, खासकर अब्राहम समझौते के बाद। हालांकि ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान किसी भी गुप्त कूटनीतिक बैठक का दावा खाड़ी क्षेत्र की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
यदि इस तरह की कोई मुलाकात वास्तव में हुई होती, तो इसका असर ईरान और खाड़ी देशों के संबंधों पर भी पड़ सकता था। यही वजह है कि यूएई ने तुरंत आधिकारिक प्रतिक्रिया देकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की।
Iran-Israel: क्षेत्रीय राजनीति पर पड़ सकता है असर
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच इजरायल और UAE के बीच कथित गुप्त मुलाकात का विवाद आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना रह सकता है। फिलहाल दोनों देशों के बयानों के बाद स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह मामला क्षेत्रीय कूटनीति और सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।





