रिपोर्ट- आजाद सक्सेना
Dantewada Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ के सबसे नक्सल प्रभावित जिले दंतेवाड़ा में एक बार फिर नक्सल विरोधी अभियान को बड़ीसफलता मिली है। दंतेवाड़ा पुलिस के द्वारा लगातार चलाए जा रहे “घर वापसी अभियान” के अंतर्गत कुल 63 नक्सलियों ने हथियार डाल कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इन सभी माओवादियों ने दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक गौरव राय के सामने आत्मसमर्पण किया है।

Dantewada Naxal Surrender: समर्पण करने वालों में 36 इनामी ऩक्सली
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 36 इनामी माओवादी शामिल हैं, जिन पर सरकार द्वारा कुल 1 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के अनुसार, ये नक्सली बीजापुर, नारायणपुर और ओडिशा के कालाहांडी क्षेत्र में सक्रिय थे।
इस आत्मसमर्पण में नक्सल संगठन के कुछ बड़े नाम भी सामने आए हैं, जिनमें कालाहांडी एरिया कमेटी के DVCM अकलू रेणु, भैरमगढ़ एरिया कमेटी के DVCM मोहन कड़ती, उनकी पत्नी ACM सुमित्रा सहित अन्य हार्डकोर माओवादी शामिल हैं।

Dantewada Naxal Surrender: सरकार की पुनर्वास नीति का असर
दंतेवाड़ा एसपी गौरव राय ने बताया कि पुलिस और प्रशासन द्वारा लगातार नक्सलियों से हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की जा रही थी, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति का पूरा लाभ दिया जाएगा। इस बड़ी कार्रवाई को नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में एक अहम कदम माना जा रहा है।
Dantewada Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ में 2025 में नक्सलियों का आत्मसमर्पण
Dantewada Naxal Surrender: साल 2025 में 317 नक्सलियों से अधिक को मार गिराया गया है, 862 को गिरफ्तार किया गया है और 1,973 ने अधिक ने आत्मसमर्पण किया है। अकेले 2024 में 290 नक्सलियों को मार गिराया गया, 1,090 को गिरफ्तार किया गया और 881 ने आत्मसमर्पण किया था। सुरक्षा बलों और राज्य सरकार द्वारा चलाए गए सरेंडर और पुनर्वास अभियान के तहत इस वर्ष बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इसके पीछे नक्सलवाद के विचारों से निराशा, सरकारी योजनाओं से जुड़ने की चाह और सुरक्षा दबाव जैसे कई कारण हैं।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 2026 मार्च तक देश से नक्सली यानि नक्सलवादी आतंक से खात्मे का ऐलान किया है। गृहमंत्री शाह के इस ऐलान के बाद सुरक्षा बलों ने लाल आतंक पर लगाम कसने अभियान तेज कर दिया, उसका ही परिणाम है कि या तो नक्सली सरेंडर कर रहे हैं या फिर मार दिए जा रहे हैं।
Dantewada Naxal Surrender: जनवरी – मार्च 2025: चालू वर्ष की शुरुआत में ही 29 नक्सलियों ने नारायणपुर जिले में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। इसमें 22 पुरुष और 7 महिलाएँ शामिल थीं, जो मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार हुए।
जुलाई 2025: बस्तर के पाँच जिलों — बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर और सुखमा — में अलग-अलग समय पर 66 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। इसमें से 49 पर कुल इनाम लगभग ₹2.27 करोड़ था, और इनमें कई महिलाएँ भी शामिल थीं।
अक्टूबर 2025: दंतेवाड़ा और अबुंझमाड़ क्षेत्र में एक बड़ा झटका लगा जब लगभग 170 नक्सलियों ने हथियार समर्पित किए, जिसे सरकार ने “ऐतिहासिक” बताया। इसके साथ ही कुछ रिपोर्टों में बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण भी दर्ज हुआ, जिसमें 208 से 210 नक्सली भी सम्मिलित बताए गए हैं।
दिसंबर 2025: साल के अंत में 34 नक्सलियों ने बीजापुर जिले में आत्मसमर्पण किया और पहले भी कुछ छोटे समूहों में नक्सलियों ने हथियार छोड़े। इन घटनाओं ने सूचित किया कि नक्सलियों का ख़ुद का मनोबल टूट रहा है और वे मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पूरे 2025 में छत्तीसगढ़ में लगभग 1,973 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में बहुत अधिक है और नक्सलवाद पर प्रभावी दबाव का संकेत देता है।





