इलाहाबाद: हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव का मामला अब संसद तक जा पहुंचा है, ऐसे में विपक्षी दल जस्टिस शेखर कुमार पर महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। अगर महाभियोग प्रस्ताव पूरी तरह संपन्न हो जाता है तो ऐसे में जज शेखर कुमार को पद से हटाने का रास्ता साफ हो जाएगा। लेकिन यह प्रक्रिया इतनी आसान लग रही है उतनी है नहीं। बता दें कि अभी तक 3 जजों पर महाभियोग प्रस्ताव का मुद्दा उठाया गया था, लेकिन प्रक्रिया इतनी कठिन थी कि प्रस्ताव पारित न हो सका। अब ऐसे में कयास यही लगाए जा रहे है कि अगर विपक्षी दल महाभियोग लाने में सफल हो जाते है तो शेखर कुमार यादव पहले जज होंगे, जिन्हें महाभियोग प्रस्ताव के तहत पद से हटाया गया हो।
अब तक किसी भी जज के खिलाफ नहीं हुई कार्रवाई
हिन्दुस्तान के इतिहास में अभी तक सिर्फ 3 जजों पर ही महाभियोग का मुद्दा उठा था लेकिन प्रक्रिया पूरी न हो सकी। यही वजह है कि अभी तक कोई भी जज महाभियोग के कारण पद से नहीं हटाया गया।
क्या जज हो हटाया जा सकता है
हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जज को महाभियोग के जरिये हटाया जा सकता है। संविधान के अनुच्छेद 124{4} और अनुच्छेद 217 में इस पर विस्तार से बात की गई है। यह प्रक्रिया बहुत कठोर है, केवल जज के दुराचार या कर्म.अक्षमता के आधार पर ही इसे शुरू कर सकते हैं। यहां बता दें कि दुराचार संबंधी मामलों में भ्रष्टाचार, कदाचार से जुड़े मामले आते हैं, जबकि कर्म अक्षमता उस स्थिति को कहते हें जिसमें कोई मानसिक या शारीरिक स्तर की वजह से इस पद और कार्य के योग्य न हो। हालांकि उसके भाषण इस श्रेणी में नहीं आते लेकिन उसको ख्याल रखना होता है कि उसको किन बातों पर सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी करनी चाहिए या नहीं और किस स्तर तक, क्योंकि वो जिस संस्था से संबंधित है वो न्याय से संबंधित है जिसमें न्याय करना भी होता है और न्याय के अनुकूल आचरण करते हुए भी दिखना होता है।
महाभियोग पारित के लिए 163 सदस्यों का समर्थन जरूरी
बता दें कि सदन में विपक्ष के 100 सांसद है, जबकि महाभियोग प्रस्ताव पारित कराने के लिए 163 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है। ऐसे में अगर सत्ता पक्ष ने दूरी बना ली तो प्रस्ताव पारित नहीं हो सकता।





