BY: Yoganand Shrivastva
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के 12 मजदूर पिछले कई हफ्तों से किर्गिस्तान में फंसे हुए हैं और गंभीर उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। परिवारों द्वारा लगातार मदद की गुहार लगाने के बाद जिला प्रशासन ने मामले पर कार्रवाई शुरू कर दी है और प्रदेश के गृह विभाग को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है।
सरकार को भेजी गई पूरी जानकारी
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि गृह विभाग के निर्देश के बाद इन सभी 12 मजदूरों के विवरण जुटाकर रिपोर्ट तैयार की गई है। इसका उद्देश्य उनकी सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक कदम जल्द शुरू करना है।
टॉर्चर और अवैध वसूली का आरोप
परिजनों का कहना है कि किर्गिस्तान में मौजूद एजेंट मजदूरों को प्रताड़ित कर रहे हैं और उन्हें भारत लौटाने के लिए 2 लाख रुपये तक की मांग कर रहे हैं। मजदूरों ने अपने परिवारों को वीडियो संदेश भेजकर मदद की अपील भी की है।
अधिकारियों से गुहार
फंसे हुए युवकों के परिजनों ने इस सप्ताह डीएम ज्ञानेंद्र सिंह और एसपी अभिषेक यादव से मुलाकात कर पूरी स्थिति बताई। उन्होंने बताया कि तीन महीने पहले स्थानीय एजेंटों ने उन्हें नौकरी का झांसा देकर किर्गिस्तान भेजा था। प्रत्येक व्यक्ति से लगभग 2.5 लाख रुपये वसूले गए और गलत अनुबंधों के आधार पर केवल 59 दिनों का वीज़ा दिया गया।
अमानवीय व्यवहार का दावा
परिजनों ने आरोप लगाया है कि मजदूरों को अलग-अलग शहरों में जबरन काम कराया जा रहा है, उन्हें पर्याप्त खाना नहीं दिया जा रहा तथा वापस आने से रोका जा रहा है। आरोप है कि एजेंट उनके साथ मारपीट कर रहे हैं और बेहद खराब परिस्थितियों में रहने पर मजबूर कर रहे हैं।
पुलिस जांच जारी
एसपी अभिषेक यादव ने पुष्टि की कि मामले की जांच नगर क्षेत्राधिकारी दीपक चतुर्वेदी को सौंपी गई है। परिवारों ने लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि पीलीभीत की एक कॉलोनी में स्थित एक स्थानीय कंपनी और उसके प्रतिनिधियों ने युवकों को झूठे वादों के तहत विदेश भेजा। जिला प्रशासन का कहना है कि भेजी गई रिपोर्ट से राज्य सरकार को जल्द कदम उठाने और मजदूरों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।





