रिपोर्ट– चन्द्रकान्त
कोरिया जिले की सलका ग्राम पंचायत में बने अटल आवास एक बार फिर विवादों में हैं। लगभग 15 वर्ष पहले छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा तैयार की गई इस कॉलोनी में हितग्राहियों को मकान आवंटित किए गए थे, लेकिन अधिकांश लाभार्थी यहां रहने नहीं पहुंचे। लंबे समय तक खाली पड़े इन मकानों पर बाहरी लोगों का कब्जा बढ़ता गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, बिहार व अन्य राज्यों के व्यक्तियों ने यहां अनधिकृत रूप से रहना शुरू किया, जिनमें से दो की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत भी हो चुकी है।

अवैध कब्जा और पक्के निर्माण से बढ़ी समस्या
ग्रामीणों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में स्थिति और बिगड़ी है। मुख्य सड़क के किनारे स्थित इन मकानों को कुछ लोगों ने स्थायी ठिकाने में बदल दिया है। कई जगहों पर पक्के निर्माण किए गए हैं, जिससे क्षेत्र का स्वरूप बदल गया है। पंचायत की ओर से इस अवैध कब्जे की शिकायत कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचाई गई, लेकिन शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई न होने से कब्जाधारियों के हौसले और बढ़ गए हैं।

हाउसिंग बोर्ड की निगरानी पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कोरिया हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी सीके ठाकुर को तीन जिलों की ज़िम्मेदारी दी गई है, जिसके कारण वे मैदान में कम दिखाई देते हैं। अधिकतर समय रायपुर में रहने से स्थानीय कार्यों की निगरानी प्रभावित हो रही है। बोर्ड की लापरवाही का नतीजा यह है कि सार्वजनिक आवास बस्तियां धीरे-धीरे अवैध कब्जे का केंद्र बन गई हैं।
ग्रामीणों की मांग—‘कठोर कार्रवाई ही एकमात्र समाधान’
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो अवैध निर्माण और बढ़ेंगे और सार्वजनिक संपत्ति निजी कब्जे में बदलती जाएगी। ग्रामीणों ने जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से तुरंत कार्रवाई की मांग की है, ताकि अटल आवास परियोजना का मूल उद्देश्य सुरक्षित रहे।





