रिपोर्टर: आगस्टीन हेम्बरम
दुमका: जिला के काठीकुंड प्रखंड के पिपरा पंचायत अंतर्गत तिलायटांड गांव में स्वतंत्रता सेनानी और अखंड बिहार के पूर्व विधायक चडरा मुर्मू उर्फ चंदा मुर्मू के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। उनके पुत्रवधू लुखी हेम्बरम और पौत्र अनिकेत मुर्मू मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
पुत्रवधू लुखी हेम्बरम ने बताया कि उनके ससुर गांधीवादी विचारधारा के थे और उन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में स्वतंत्रता सेनानी मोतीलाल केजरीवाल के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी योगदान के लिए उन्हें 15 अगस्त 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया गया था।
चडरा मुर्मू 1969 में शिकारीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र से स्वतंत्र चुनाव जीतकर विधायक बने थे, उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी बरियार हेम्बरम को पराजित किया था। लेकिन उनके निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। लुखी हेम्बरम ने बताया कि उनके पति दीबू मुर्मू के समय तक और सास के निधन के बाद उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
आर्थिक संघर्ष और शिक्षा:
लुखी हेम्बरम ने बताया कि 2017 में पति के निधन के बाद उन्हें अपने एकलौते बेटे अनिकेत मुर्मू की पढ़ाई के लिए मजदूरी करनी पड़ी। उन्होंने बेटे को 2024 में बीएड तक पढ़ाया, लेकिन सरकारी नियम और नीतियों के कारण बेटा भी अब बेरोजगार है। परिवार को जनवितरण योजना के तहत केवल चावल ही मिल रहा है। अब तक उन्हें अवुआ आवास, विधवा पेंशन या अन्य कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है।
पुत्रवधू लुखी हेम्बरम ने कहा,
“मैं मजदूरी करके अपने बेटे को पढ़ा रही हूं। हर दिन संघर्ष में गुजरता है, लेकिन बेटे की शिक्षा मेरी प्राथमिकता है।”
सांसद की प्रतिक्रिया:
दुमका लोकसभा सांसद नलीन सोरेन ने इस मामले पर कहा कि स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व विधायक चडरा मुर्मू के परिवार के पेंशन और कल्याण के लिए वे निश्चित रूप से पहल करेंगे।





