by: vijay nandan
दिल्ली: चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों को लेकर देशभर के 270 से अधिक रिटायर्ड अधिकारियों, जिनमें पूर्व जज, ब्यूरोक्रेट और सैन्य अधिकारियों ने बुधवार को एक ओपन लेटर जारी किया है। इस पत्र में कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी की तीखी आलोचना की गई है और आरोप लगाया गया है कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं की साख कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। इस लेटर पर 16 पूर्व जज, 123 सेवानिवृत्त ब्यूरोक्रेट (14 पू राजदूत सहित) और 133 रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। इनमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आदर्श कुमार गुप्ता, पूर्व जज हेमंत गुप्ता, पूर्व RAW चीफ संजय त्रिपाठी और NIA के पूर्व डायरेक्टर योगेश चंद्र मोदी शामिल हैं।


ओपन लेटर में क्या कहा गया?
अधिकारियों ने पत्र में आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठाकर जनता के बीच अविश्वास फैलाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। लेटर में लिखा है कि “चुनाव आयोग भारत की चुनाव प्रणाली का सबसे अहम स्तंभ है। उस पर बार-बार आरोप लगाने से उसकी विश्वसनीयता कमजोर होती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद जरूरी हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार प्रहार करना देशहित के खिलाफ है।
लेटर की 5 बड़ी बातें
- संस्थाओं पर लगातार हमले को बताया खतरनाक चलन
लेटर में कहा गया कि पहले सेना, फिर न्यायपालिका, संसद और अब चुनाव आयोग पर हमला करने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है। इसे उन्होंने “खतरनाक राजनीतिक संस्कृति” बताया है।
- राहुल के आरोप बेबुनियाद, न कोई शिकायत, न सबूत
पूर्व अधिकारियों ने लिखा कि राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’, ‘गद्दारी’ जैसे शब्दों का उपयोग किया और अधिकारियों को धमकाया, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक शिकायत या हलफनामा पेश नहीं किया। यह केवल राजनीतिक बयानबाजी है।
- विपक्ष जीतता है तो आयोग पर भरोसा, हारते ही आरोप
पत्र के अनुसार विपक्षी पार्टियां जब जीतती हैं तो चुनाव आयोग पर कोई आरोप नहीं लगातीं, लेकिन हार मिलते ही आयोग पर सवाल उठाना शुरू कर देती हैं। इसे उन्होंने राजनीतिक अवसरवाद बताया।
- टीएन शेषन और एन गोपालस्वामी का उदाहरण देते हुए आयोग को बताया निष्पक्ष संस्था।
लेटर में कहा गया कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों ने आयोग की विश्वसनीयता को स्थापित किया है, इसलिए आज उस पर अनावश्यक हमले लोकतंत्र को नुकसान पहुँचाते हैं।
- फर्जी वोटर और गैर-नागरिक नाम हटाना जरूरी।
अधिकारियों ने लिखा कि चुनाव आयोग की ज़िम्मेदारी है कि फर्जी वोटरों और गैर-नागरिकों को वोटर लिस्ट से हटाया जाए। यह काम राष्ट्रहित से जुड़ा है और इसे गलत तरीके से पेश नहीं किया जाना चाहिए।

राहुल गांधी ने लगाए थे गंभीर आरोप
राहुल गांधी हाल ही में तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग पर “वोट चोरी” का आरोप लगाया था।
4 नवंबर को उन्होंने बिहार में वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने का मुद्दा उठाया और पाँच कथित पीड़ितों को मंच पर बुलाया।
18 सितंबर को उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर “लोकतंत्र को नष्ट करने वालों को बचाने” का आरोप लगाया।
7 अगस्त को उन्होंने कर्नाटक की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी दिखाते हुए 22 पेज का प्रेजेंटेशन दिया था।
राहुल ने कहा था कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में वोट चोरी हुई है और बिहार में भी वही ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

कांग्रेस की रणनीति: SIR के खिलाफ रैली की तैयारी
कांग्रेस ने वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी और SIR (Systematic Invalid Removal) को लेकर 12 राज्यों के नेताओं की बैठक की है। पार्टी दिसंबर के पहले हफ्ते में दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली करेगी। बैठक में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।
रिटायर्ड अधिकारियों का यह लेटर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता की रक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक चिंताओं का मुद्दा बता रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज़ होने की संभावना है।





