अजयगढ़: बुंदेलखंड में अब भी ज़िंदा है पुरानी स्वागत परंपरा, खोरा गांव में अनोखा नजारा

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रिपोर्ट- राजा

अजयगढ़: बुंदेलखंड की धरती अपनी परंपराओं और संस्कृति के लिए जानी जाती है। आधुनिकता के दौर में जहां नए जमाने का शोरगुल और डीजे का चलन बढ़ गया है, वहीं बुंदेलखंड के गांव आज भी अपनी विरासत को संजोए हुए हैं। यहां अतिथि या जनप्रतिनिधि का स्वागत आज भी पुराने रीति-रिवाजों और मन को छू लेने वाली परंपराओं के साथ किया जाता है।

अजयगढ़ क्षेत्र के खोरा गांव में ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। महाविद्यालय के भूमि पूजन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने उनका स्वागत बिल्कुल उसी तरह किया, जैसे पुराने ज़माने में किया जाता था।

गांव में स्वागत के दौरान न कोई डीजे था, न तेज आवाज वाला आधुनिक सिस्टम।
यहां अतिथियों का स्वागत घोड़े की साज, पुरानी बजती शहनाई, ढोलक, तबला और हारमोनियम की मधुर धुनों से किया गया। यह नजारा न सिर्फ परंपरा की झलक दिखाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि बुंदेलखंड के गांव आज भी अपनी सांस्कृतिक पहचान को गहराई से संजोए हुए हैं।

खोरा गांव के इस आयोजन ने एक बार फिर यह एहसास दिलाया कि आधुनिकता के बावजूद बुंदेलखंड की मिट्टी में रचा-बसा संस्कृति का रंग आज भी फीका नहीं पड़ा है।

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