Woman Postmortem Worker: गरियाबंद की सरस्वती सहानी बनी साहस की मिसाल

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Woman Postmortem Worker: पुरुषों के पीछे हटने पर सरस्वती ने उठाई जिम्मेदारी

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में रहने वाली सरस्वती सहानी अपने साहस और हिम्मत के लिए जानी जाती हैं। समाज में जहां पोस्टमार्टम जैसे काम को बेहद कठिन और संवेदनशील माना जाता है, वहीं सरस्वती ने इसे अपना पेशा बनाकर एक अनोखी मिसाल पेश की है।

जानकारी के अनुसार सरस्वती सहानी अब तक 2 हजार से भी अधिक शवों का पोस्टमार्टम कर चुकी हैं। इतना ही नहीं, एक बार में उन्होंने लगातार 9 शवों का पोस्टमार्टम कर अपनी कार्यक्षमता और साहस का परिचय दिया है। पिछले करीब 9 वर्षों से वह डॉक्टरों की निगरानी में यह जिम्मेदारी निभा रही हैं।

Woman Postmortem Worker: संघर्ष से सफलता तक का सफर

राजिम क्षेत्र की रहने वाली सरस्वती सहानी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। शुरुआत में वह मछली और मुर्गा काटने का काम करती थीं। बाद में उन्होंने अस्पताल में आया (सहायक कर्मचारी) के रूप में काम शुरू किया।

इसी दौरान एक बार अस्पताल में पुलिस और डॉक्टरों को पोस्टमार्टम के लिए किसी व्यक्ति की जरूरत पड़ी। जब इस काम के लिए कोई पुरुष आगे नहीं आया, तब सरस्वती ने हिम्मत दिखाते हुए यह जिम्मेदारी स्वीकार की।

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तब से लेकर आज तक वह लगातार यह काम कर रही हैं और कई मामलों में पोस्टमार्टम के माध्यम से पुलिस को अपराध की गुत्थी सुलझाने में भी मदद करती हैं। अपने साहस और समर्पण से सरस्वती सहानी आज समाज में महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी हैं।

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