दिल्ली: विधानसभा चुनाव 2025 के शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बहुमत मिलते हुए देखा जा रहा है। यदि अंतिम नतीजों में भी यह बढ़त बरकरार रहती है, तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। भाजपा अक्सर अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर चौंकाने वाले फैसले लेती रही है, ऐसे में दिल्ली के लिए भी कोई अप्रत्याशित नाम सामने आ सकता है। फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं में प्रवेश वर्मा, रमेश बिधूड़ी और दुष्यंत गौतम के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं।
प्रवेश वर्मा प्रवेश वर्मा का नाम इसलिए चर्चा में है क्योंकि अगर वे अपनी सीट पर जीत दर्ज करते हैं, तो वे आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख और मौजूदा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पराजित करेंगे। केजरीवाल को हराना भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक जीत होगी और इससे वर्मा की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी मजबूत हो सकती है। इसके अलावा, वर्मा जाट समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जिससे भाजपा को दिल्ली और हरियाणा के जाट वोटरों को साधने में मदद मिल सकती है। वर्मा के हालिया बयानों से भी उनकी महत्वाकांक्षाओं के संकेत मिलते हैं, जहां उन्होंने दावा किया कि दिल्ली के जाट भाजपा के साथ हैं और विकास केवल भाजपा के शासन में ही संभव है।
रमेश बिधूड़ी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में रमेश बिधूड़ी का नाम भी सामने आ रहा है। कालकाजी सीट से भाजपा के उम्मीदवार बिधूड़ी गुर्जर समुदाय से आते हैं और अपने समुदाय में गहरी पकड़ रखते हैं। हालांकि, उनके विवादित बयान अक्सर चर्चा में रहते हैं, लेकिन पार्टी ने उनके खिलाफ कभी कठोर कार्रवाई नहीं की है। चुनाव प्रचार के दौरान उनके तीखे बयानों ने उन्हें सुर्खियों में रखा, जिससे उनके राजनीतिक कद में इजाफा हुआ है।
दुष्यंत गौतम करोल बाग से भाजपा के उम्मीदवार दुष्यंत गौतम को भी मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अपने पारंपरिक फैसलों से हटकर दुष्यंत गौतम को यह जिम्मेदारी सौंप सकती है। गौतम एससी समुदाय से आते हैं, और उनके चयन से भाजपा दलित वोटरों को साधने के साथ-साथ बिहार के आगामी चुनावों को भी ध्यान में रख सकती है। इसके अलावा, भाजपा में अब तक कोई एससी मुख्यमंत्री नहीं रहा है, इसलिए यह फैसला पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी हो सकता है।
विजेंदर गुप्ता वरिष्ठ भाजपा नेता विजेंदर गुप्ता भी इस दौड़ में शामिल हैं। वे दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं और आम आदमी पार्टी व अरविंद केजरीवाल के खिलाफ हमेशा मुखर रहे हैं। जब भाजपा दिल्ली में कमजोर स्थिति में थी, तब भी गुप्ता ने अपनी सीट पर जीत दर्ज की थी। इस बार भी रोहिणी से वे मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं। 2020 के चुनावों में भाजपा को केवल आठ सीटें मिली थीं जबकि आप ने 62 सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के आसार हैं, जिससे गुप्ता की भूमिका भी अहम हो सकती है।
यदि भाजपा बहुमत हासिल करती है, तो पार्टी नेतृत्व किसे मुख्यमंत्री बनाता है, यह देखना दिलचस्प होगा। पार्टी के पास कई मजबूत उम्मीदवार हैं और अंतिम फैसला पार्टी की रणनीतिक प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा।
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