अमेरिका की अपील कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ज्यादातर टैरिफ को गैरकानूनी घोषित किया है। कोर्ट का कहना है कि ट्रम्प ने इमरजेंसी पावर्स का इस्तेमाल किया, जिसका उन्हें कानूनी अधिकार नहीं था।
हालांकि, कोर्ट ने इस फैसले को तुरंत लागू करने से रोक दिया है, ताकि ट्रम्प सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें। फिलहाल, सभी टैरिफ लागू हैं।
ट्रम्प का रिएक्शन
ट्रम्प ने कोर्ट के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए लिखा :
“सभी टैरिफ अभी भी लागू हैं। अपील कोर्ट ने गलत तरीके से कहा कि हमारे टैरिफ हटाए जाने चाहिए, लेकिन आखिर में अमेरिका जीतेगा।”

ट्रम्प सरकार ने कोर्ट में यह भी कहा कि अगर टैरिफ हटाए गए, तो 159 अरब डॉलर (लगभग 13 लाख करोड़ रुपए) की वसूली वापस करनी पड़ सकती है। इससे अमेरिकी खजाने को बड़ा झटका लगेगा।
कोर्ट का आदेश: 150 दिन तक 15% टैरिफ
कोर्ट ने कहा कि ट्रम्प 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत 150 दिन तक 15% टैरिफ लगा सकते हैं, लेकिन इसके लिए ठोस कारण होना आवश्यक है।
ट्रम्प ने चीन, कनाडा, मेक्सिको और अन्य देशों पर व्यापार घाटे और अन्य कारणों से टैरिफ लगाए थे।
ट्रम्प के टैरिफ का भारत पर असर
- भारत पर ट्रम्प ने 50% टैरिफ लगाया, जो 27 अगस्त से लागू है।
- ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, यह भारत के लगभग ₹5.4 लाख करोड़ के एक्सपोर्ट को प्रभावित कर सकता है।
- इससे अमेरिका में बिकने वाले कपड़े, जेम्स-ज्वेलरी, फर्नीचर और सीफूड महंगे हो जाएंगे।
- भारतीय प्रोडक्ट्स की मांग में लगभग 70% कमी आने की संभावना है।
- चीन, वियतनाम और मेक्सिको जैसे देशों के प्रोडक्ट्स सस्ते होने से भारत की अमेरिकी बाजार हिस्सेदारी घट सकती है।
टैरिफ की वजहें: रूस से तेल और व्यापार घाटा
- 6 अगस्त को रूस से तेल खरीद पर जुर्माने के तौर पर टैरिफ लागू किया गया।
- 7 अगस्त से भारत पर 25% टैरिफ लगाया गया, व्यापार घाटा और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए।
- भारत, चीन के बाद रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है।
- यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से केवल 0.2% (68 हजार बैरल/दिन) तेल आयात करता था।
- मई 2023 तक यह बढ़कर 45% (20 लाख बैरल/दिन) हो गया।
- 2025 में जनवरी-जुलाई तक भारत रोजाना 17.8 लाख बैरल तेल रूस से खरीद रहा है।
- पिछले दो सालों में भारत हर साल 130 अरब डॉलर (11.33 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा का रूसी तेल खरीद चुका है।
अमेरिकी कोर्ट का फैसला ट्रम्प के टैरिफ को चुनौती देता है, लेकिन फिलहाल लागू हैं। भारत सहित दुनिया के कई देशों के व्यापार पर इन टैरिफ का गहरा असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर: अमेरिकी व्यापार नीतियों की गड़बड़ी और उच्च टैरिफ भारत के निर्यातकों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।