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सावन में उज्जैन के स्कूलों की छुट्टियों में बदलाव, कांग्रेस विधायक ने उठाए सवाल, बीजेपी का पलटवार

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सावन में उज्जैन के स्कूलों की छुट्टियों में बदलाव, कांग्रेस विधायक ने उठाए सवाल, बीजेपी का पलटवार

सावन का महीना शुरू होते ही उज्जैन में धार्मिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। खासकर महाकाल की सवारी के चलते जिला प्रशासन ने स्कूलों के टाइमटेबल में बदलाव किया है। अब सावन के कुछ सोमवार को स्कूलों में अवकाश रहेगा, जबकि उस सप्ताह रविवार को स्कूल खोले जाएंगे। इस फैसले ने जहां धार्मिक श्रद्धा को प्राथमिकता दी है, वहीं राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है।


कौन-कौन से दिन बदला रहेगा स्कूल शेड्यूल?

उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार:

  • सोमवार को छुट्टी रहेगी:
    • 4 जुलाई
    • 21 जुलाई
    • 28 जुलाई
    • 4 अगस्त
    • 11 अगस्त
  • रविवार को स्कूल खुलेंगे:
    • 13 जुलाई
    • 20 जुलाई
    • 27 जुलाई
    • 3 अगस्त
    • 10 अगस्त

यह आदेश नगरीय क्षेत्र के सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर लागू होगा — कक्षा 1 से 12वीं तक।


बदलाव की वजह क्या है?

प्रशासन के अनुसार सावन के दौरान महाकाल मंदिर से निकलने वाली शोभायात्रा (महाकाल सवारी) में भारी भीड़ उमड़ती है। इस दौरान:

  • कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया जाता है
  • सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहती है
  • विद्यार्थियों और अभिभावकों को आवागमन में दिक्कत होती है

इन्हीं कारणों से स्कूलों के समय में बदलाव किया गया ताकि सुरक्षा और श्रद्धा दोनों का सम्मान हो।


कांग्रेस विधायक की आपत्ति: क्या सभी धर्मों को मिलेगी ऐसी छूट?

भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा:

“महाकाल की सवारी तो वर्षों से निकलती आ रही है, लेकिन पहली बार ऐसा आदेश आया है। अगर किसी अन्य धर्म के लोग भी इसी तरह की मांग करें तो क्या उन्हें भी वैसी ही छुट्टियाँ दी जाएंगी? देश धर्म से नहीं, संविधान से चलता है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह आदेश मुख्यमंत्री को खुश करने के लिए दिया गया है।


बीजेपी का जवाब: “ये सनातन परंपरा का सम्मान है”

विधायक मसूद के बयान पर मंत्री विश्वास सारंग ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:

“आरिफ मसूद जैसे लोगों पर टिप्पणी करना समय की बर्बादी है। उज्जैन में महाकाल बाबा की शोभायात्रा एक ऐतिहासिक परंपरा है। सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया ताकि युवा श्रद्धालु यात्रा में भाग ले सकें।”


उज्जैन में सावन के पावन महीने के दौरान स्कूलों के टाइमटेबल में बदलाव, धार्मिक परंपराओं और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए किया गया है। लेकिन यह फैसला राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बन गया है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन का यह निर्णय सबको समान रूप से स्वीकार्य होगा या यह धार्मिक भेदभाव के आरोपों के घेरे में आएगा?

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