रिपोर्टर: विशाल दुबे
Ujjain : धर्मधनी उज्जैन के विकास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरियाखेड़ी ग्राम में ‘हरियाखेड़ी जल आवर्धन परियोजना’ का भूमिपूजन किया। वेद मंत्रों की गूंज और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुए इस कार्यक्रम ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को नई गति दी है। ₹1133.67 करोड़ की यह महत्वाकांक्षी योजना न केवल सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की प्यास बुझाएगी, बल्कि वर्ष 2055 तक शहर की जल सुरक्षा का मजबूत आधार बनेगी।

सिंहस्थ 2028: जल प्रबंधन की विशाल तैयारी
Ujjain आगामी सिंहस्थ के दौरान उज्जैन की जनसंख्या और मेला क्षेत्र में आने वाले 21.83 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को तैयार किया गया है। अनुमान है कि ‘राजसी स्नान’ के विशेष दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या 228 लाख तक पहुँच सकती है। इस भारी दबाव को संभालने के लिए परियोजना के तहत सेलारखेड़ी, गंभीर, उंडासा और साहिबखेड़ी को मुख्य जल स्रोत बनाया गया है। हरियाखेड़ी और गंभीर डैम पर दो नए ‘इंटेक वेल’ का निर्माण किया जाएगा, जिससे भविष्य में पानी की कोई कमी न रहे।

बुनियादी ढांचे का कायाकल्प: 250 MLD की शोधन क्षमता
Ujjain इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जल शोधन और वितरण प्रणाली का आधुनिकीकरण है।
- नया सेटअप: अंबोदिया, गौघाट और हरियाखेड़ी में तीन नए जल शोधन संयंत्र (WTP) स्थापित किए जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता 250 MLD होगी।
- नवीनीकरण: वर्तमान में संचालित 7 पुराने संयंत्रों की क्षमता को भी उन्नत (Upgrade) किया जाएगा।
- वितरण नेटवर्क: शहर भर में 17 नए ओवरहेड टैंकों का निर्माण और 708 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसमें पुरानी जर्जर पाइपलाइनों को बदलकर 534 किलोमीटर का नया वितरण नेटवर्क तैयार करना शामिल है, जिससे 49,087 घरों को सीधे नल कनेक्शन मिलेंगे।
2055 तक उज्जैन और आसपास के गांवों की जल सुरक्षा
Ujjain मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह परियोजना केवल सिंहस्थ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उज्जैन के आगामी तीन दशकों के विकास का खाका है। परियोजना अगले 24 महीनों में चरणबद्ध तरीके से पूरी होगी और शहर के साथ-साथ आसपास के 20 गांवों को भी शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करेगी। यह योजना स्वच्छता, स्वास्थ्य और उज्जैन के समग्र शहरी विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। भूमिपूजन के दौरान हुई मंत्रोच्चार की गूंज ने इस विकास कार्य को एक पवित्र सेवा के रूप में रेखांकित किया।






