Isa Ahmad
Tribal Land Dispute: सरगुजा जिले में जमीन को लेकर नया विवाद सामने आया है, जिसने अब सियासी रूप ले लिया है। माजा ग्राम पंचायत के राजा कटैल इलाके में रहने वाले संरक्षित जनजाति पंडो समाज के लोगों ने एक विशेष समुदाय के लोगों पर उनकी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। अपनी जमीन वापस दिलाने की मांग को लेकर पंडो समाज के ग्रामीण कलेक्टर और एसपी कार्यालय पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई। मामले के सामने आने के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। वहीं कलेक्टर ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
Tribal Land Dispute: ग्रामीणों का आरोप – बहला-फुसलाकर जमीन पर किया कब्जा
पंडो समाज के ग्रामीणों का कहना है कि करीब 30 से 40 साल पहले मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग बकरी पालन का व्यवसाय करने के लिए इस गांव में आए थे। शुरुआत में उन्होंने झोपड़ियां बनाकर रहना शुरू किया, लेकिन समय के साथ ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि अब पंडो समाज की अधिकांश जमीन पर इन लोगों का कब्जा हो चुका है और कई वर्षों से शिकायत करने के बावजूद अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
Tribal Land Dispute: ग्रामीणों का यह भी कहना है कि राजा कटैल गांव में पहले से पंडो समाज के आदिवासी रहते आए हैं और नियम के अनुसार आदिवासी की जमीन को गैर-आदिवासी न तो खरीद सकता है और न ही उस पर कब्जा कर सकता है। इसके बावजूद कथित रूप से जमीन पर कब्जा कर लिया गया और कब्जा करने वाले लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी मिल गया, जो नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है।
Tribal Land Dispute: मामले ने पकड़ा सियासी रंग, प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा
जमीन कब्जे के इस मामले को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है। प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने भी माना कि पंडो समाज की जमीन पर कब्जा या उसकी खरीदी-बिक्री करना नियमों के खिलाफ है। हालांकि उन्होंने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप भाजपा पर लगाया है।
Tribal Land Dispute: वहीं जिला कलेक्टर ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही है। फिलहाल सरगुजा में सामने आया यह जमीन विवाद सियासी बहस का विषय बन गया है। अब सभी की नजर प्रशासन की जांच पर टिकी है कि क्या पंडो समाज के लोगों को उनकी जमीन वापस मिल पाएगी और गैर-आदिवासियों को शासकीय योजनाओं का लाभ कैसे मिला, इसकी सच्चाई क्या है।





