BY: Yoganand Shrivastva
नाबालिग के साथ रेप के मामले में आजीवन कारावास काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को हाल में गुजरात हाईकोर्ट से छह महीने की जमानत मिलने के बाद पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। पीड़िता ने अपनी याचिका में मांग की है कि आसाराम को मिली यह जमानत रद्द की जाए।
राजस्थान हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर को चिकित्सकीय आधार पर आसाराम को छह महीने की अस्थायी जमानत दी थी, जिसके बाद गुजरात हाईकोर्ट ने भी उसी आधार पर 6 नवंबर को राहत प्रदान की। पीड़िता ने हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा है कि गंभीर आरोपों और आजीवन सजा के बावजूद जमानत देना उचित नहीं है।
गुजरात हाईकोर्ट की दो-न्यायाधीशों वाली पीठ—न्यायमूर्ति इलेश वोरा और न्यायमूर्ति आरटी वच्छानी—ने राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को आधार बनाते हुए कहा था कि 84 वर्षीय आसाराम की चिकित्सा स्थिति को देखते हुए अस्थायी जमानत दी जा रही है।
सुनवाई के दौरान आसाराम के वकील ने राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश पेश करते हुए दलील दी कि उनके मुवक्किल की हालत गंभीर है और जेल में उचित इलाज संभव नहीं है। वहीं, गुजरात सरकार की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि जो सुविधाएं जोधपुर जेल में उपलब्ध नहीं थीं, वे साबरमती सेंट्रल जेल में उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
आसाराम को जनवरी 2023 में गांधीनगर की अदालत ने एक महिला शिष्या से वर्षों तक दुष्कर्म करने के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा वह 2013 में राजस्थान आश्रम में एक नाबालिग से रेप के मामले में भी आजीवन कारावास भुगत रहा है।





