,

कभी हर सुबह गूंजती थी इसकी चहचहाहट” – शहरों से इसलिए गायब हो रही है नन्ही गौरैया?

By- Nadeem Khan

कभी सुबह की शुरुआत होती थी इनकी चहचहाहट से…पुराने घरों में छज्जे, ओटें और दीवारों के छोटे-छेद गौरैया के लिए “सपनों के घर” थे। ये छोटे-छोटे कोने उनके घोंसलों का ठिकाना, बच्चों के लिए सुरक्षित आश्रय और रात गुजारने का घर थे। लेकिन अब हर ओर ऊंची इमारतें, शीशे की दीवारें और सीमेंट की सतहें हैं।

जहाँ पहले चारों ओर हरियाली और खुले स्थान थे, अब वहां सिर्फ कंक्रीट, धुआँ और ध्वनि प्रदूषण बचा है।
शहरी विकास ने उनकी प्राकृतिक जगह छीन ली है। घरों के पुराने ढांचे बदल गए, छज्जों और खिड़कियों के किनारे गायब हो गए। परिणामस्वरूप, गौरैया अपने लिए सुरक्षित स्थान खोजने के लिए संघर्ष कर रही है।

आधुनिक शहरों ने छीना उसका घर
पुराने घरों में छज्जे, ओटें और दीवारों के छोटे छेद गौरैया के लिए “सपनों के घर” थे।
लेकिन अब हर ओर ऊंची इमारतें, शीशे की दीवारें और सीमेंट की सतहें हैं — जहां न ठिकाना है, न गर्माहट।
शहरी विकास ने उसकी प्राकृतिक जगह छीन ली।

अनाज नहीं, अब पैकेट फूड का जमाना
पहले रसोई के बाहर या छत पर अनाज सुखाया जाता था। गौरैया वहीं से दाना चुगती थी और बच्चे भी वही दाना खाते थे। लेकिन आज की आधुनिक जीवनशैली में रसोई में सब कुछ सीलबंद पैकेटों में है।

गौरैया को न दाना मिल रहा है, न कीड़े-मकोड़े।
पौधों पर या घर के आसपास प्राकृतिक भोजन घटने से उनका पोषण प्रभावित हो रहा है। नन्ही गौरैया अब अपने बच्चों को पर्याप्त भोजन नहीं दे पाती। भोजन की कमी उसकी सबसे बड़ी दुश्मन बन गई है।

कीटनाशक और प्रदूषण का दोहरा प्रहार

खेती में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक कीटनाशक और शहरों की जहरीली हवा, दोनों ने गौरैया के जीवन पर असर डाला है।
वो अपने बच्चों को छोटे कीड़े खिलाती है — जो अब खेतों से गायब हैं।
कई पर्यावरण विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि मोबाइल टावरों की रेडिएशन ने भी उसकी नेविगेशन क्षमता को प्रभावित किया है।

पेड़ों और खुली जगहों की कमी

जहां कभी नीम-पीपल के पेड़ झूमते थे, वहां अब कंक्रीट और पार्किंग है।
गौरैया के झुंड की जगह अब गाड़ियों का शोर और धुआं है।
कुदरत के साथ हमारी दूरी ने उसे बेघर कर दिया है।

उम्मीद अभी बाकी है – “इंसान बदले तो लौटेगी गौरैया”
गौरैया को वापस बुलाना मुश्किल नहीं, बस थोड़ी कोशिश चाहिए –

  • अपनी बालकनी या छत पर एक छोटा घोंसला लगाएं।
  • रोज़ एक कटोरी पानी और थोड़े दाने रखें।
  • कीटनाशक और रसायनों का उपयोग कम करें।
  • पेड़ लगाएं, और पुराने पेड़ों को बचाएं।

छोटे कदम ही इस नन्ही मेहमान की बड़ी वापसी की शुरुआत बन सकते हैं।

Kota Medical College Hospital: महिला की मौत के बाद परिजनों का हंगामा, लापरवाही के आरोप

Kota Medical College Hospital में संतोषी नगर निवासी रेखा देवी की उपचार

Sabour Bike Theft: CCTV और तकनीकी साक्ष्यों से खुला बाइक चोरी का मामला, आरोपी गिरफ्तार

Sabour Bike Theft मामले में भागलपुर पुलिस को सफलता मिली है। सबौर

Cheetah Project: कूनो से गांधी सागर पहुंचेगी CCB-2, एमपी में बढ़ेगा चीतों का कुनबा

Cheetah Project के तहत मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण की दिशा में एक

Ramanujganj Ganesh Visarjan: डीजे बंद कराने पर भड़के समिति के लोग, थाने का किया घेराव

Ramanujganj Ganesh Visarjan: बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में गणेश विसर्जन जुलूस के

Agra Mahakumbh 2026: CM साय बोले- अग्रवाल समाज ने व्यापार के साथ रोजगार और जनसेवा में दिया योगदान

Agra Mahakumbh 2026: अंबिकापुर में अग्रवाल समाज के दो दिवसीय अग्र महाकुंभ

Maroda Maharashtra Border Road : 3 मीटर की सड़क अब होगी 8 मीटर चौड़ी, राहगीरों में खुशी

Maroda Maharashtra Border Road: कांकेर जिले में मरोड़ा से महाराष्ट्र बॉर्डर तक

Teeja Pora Milan Samaroh: चिरमिरी में जुटीं हजारों महिलाएं, सांसद ज्योत्सना दास महंत हुईं शामिल

संवाददाता:अविनाश चंद्र Teeja Pora Milan Samaroh: एमसीबी जिले के नगर पालिक निगम

Madhupur News: खान एवं खनिज विधेयक 2026 के विरोध में झामुमो का धरना-प्रदर्शन, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

रिपोर्ट: इम्तियाज़ अंसारी Madhupur News मधुपुर। केंद्र सरकार के दोनों सदनों से

Service Sankalp Abhiyan: छिंदवाड़ा पहुंचे प्रभारी मंत्री राकेश सिंह, तैयारियों की समीक्षा की

Service Sankalp Abhiyan: छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश के लोक निर्माण विभाग मंत्री एवं छिंदवाड़ा