Rohtas : बिहार की चरमराती शैक्षिक व्यवस्था और निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा किए जा रहे कथित शोषण के विरोध में आज रोहतास की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। भाकपा माले के बैनर तले आयोजित इस ‘आक्रोश मार्च’ के जरिए कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों को जमकर आड़े हाथों लिया। कार्यकर्ताओं ने बाइक रैली और पैदल मार्च निकालकर शिक्षा के बढ़ते बाजारीकरण पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
Rohtas शिक्षा के ‘व्यापारीकरण’ और अभिभावकों के शोषण पर प्रहार
आक्रोश मार्च का नेतृत्व कर रहे भाकपा माले नेता अशोक बैठा ने निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा सेवा न रहकर एक संगठित व्यापार बन चुकी है। उन्होंने मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर सरकार को घेरा:
- अंधाधुंध फीस वसूली: निजी स्कूल ट्यूशन और अन्य गतिविधियों के नाम पर अभिभावकों की जेब पर डाका डाल रहे हैं।
- कमीशन का खेल: कमीशन के लालच में हर साल ड्रेस, किताबें और कॉपियां बदली जाती हैं, जिसका बोझ गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है।
- बदहाल सरकारी स्कूल: एक तरफ निजी स्कूल लूट रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों की स्थिति को जानबूझकर दयनीय बनाए रखा गया है।
Rohtas ‘एक देश, एक समान शिक्षा’ की बुलंद हुई मांग
प्रदर्शनकारियों ने एक सुर में ‘समान शिक्षा प्रणाली’ लागू करने की मांग की। भाकपा माले नेताओं का तर्क है कि जब तक देश में अमीरों और गरीबों के बच्चों के लिए अलग-अलग मानक रहेंगे, तब तक सामाजिक न्याय की कल्पना अधूरी है। अशोक बैठा ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर सरकार ने जल्द ही समान शिक्षा नीति की दिशा में कदम नहीं उठाए, तो रोहतास की यह चिंगारी पूरे देश में एक बड़े जनांदोलन की आग बनेगी।”
Rohtas शिक्षा घोटालों और अव्यवस्था पर फूटा युवाओं का गुस्सा
इस मार्च में केवल राजनीतिक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में स्थानीय युवा और परेशान अभिभावक भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिहार में आए दिन होने वाले शिक्षा घोटाले और भ्रष्टाचार ने छात्रों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है। शिक्षा के नाम पर चल रहे इस ‘धंधे’ को बंद करने और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भी सौंपा।





