रिपोर्ट: निज़ाम अली
Pilibhit गेहूं खरीद में हो रही देरी और प्रशासन की कथित दमनकारी नीतियों के खिलाफ शुक्रवार को संयुक्त किसान संगठनों ने हुंकार भरी। किसानों ने तहसील क्षेत्र के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) कार्यालय का घेराव कर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। किसानों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे।

Pilibhit गेहूं खरीद शुरू न होने से भड़का किसानों का आक्रोश
धरना दे रहे किसान नेताओं का आरोप है कि सरकार ने 31 मार्च से क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद शुरू करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, 10 अप्रैल बीत जाने के बाद भी मंडियों में खरीद प्रक्रिया ठप पड़ी है। किसानों ने कहा कि एक तरफ फसल तैयार खड़ी है, तो दूसरी तरफ ‘फार्मर रजिस्ट्री’ जैसे नए नियम थोपकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। प्रशासनिक सुस्ती के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए भटकना पड़ रहा है।

Pilibhit मुकदमे और प्रशासनिक दबाव का कड़ा विरोध
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जायज मांग उठाने वाले किसान नेताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजने का भय दिखाया जा रहा है। किसान संगठनों का कहना है कि प्रशासन संवाद करने के बजाय दबाव की राजनीति कर रहा है। इसी के विरोध में बड़ी संख्या में किसान और पदाधिकारी सुबह 11 बजे सीओ कार्यालय पहुंचे और वहीं दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए।

Pilibhit सुरक्षा के कड़े इंतजाम, उच्च अधिकारियों से वार्ता पर अड़े किसान
आंदोलन की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। कई थानों की फोर्स मौके पर मौजूद है। किसानों ने स्थानीय अधिकारियों से वार्ता करने से साफ इनकार कर दिया है। उनकी मांग है कि जब तक जिला अधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) मौके पर आकर गेहूं खरीद सुनिश्चित करने और दर्ज मुकदमे वापस लेने का ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक उनका प्रदर्शन और गिरफ्तारी की मांग जारी रहेगी।
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