BY: Yoganand Shrivastva
काठमांडू: नेपाल में हालात लगातार बदलते नजर आ रहे हैं। हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार का पतन हो गया है और अब अंतरिम सरकार के नेतृत्व को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। सत्ता के लिए अब Gen-Z के दो गुट आमने-सामने खड़े हैं।
राजधानी काठमांडू में नेपाली सेना के मुख्य अड्डे के पास दो गुटों के बीच भिड़ंत हुई। इसमें सुशीला कार्की और बालेन शाह के समर्थक आमने-सामने आए। हालांकि बालेन शाह ने पहले ही स्पष्ट किया था कि वह बिना संसद विघटन के किसी अंतरिम सरकार में शामिल नहीं होंगे। उनके समर्थक सुशीला कार्की के पक्ष में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
हालात के मुताबिक, पहले पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की के नाम पर सहमति बनने की खबर आई थी, लेकिन बाद में अंदरूनी विरोध के चलते कुलमान घीसिंग का नाम भी सामने आया।
सुरक्षा कारणों से सेना ने राजधानी और आस-पास के इलाकों में तीसरे दिन भी कर्फ्यू जारी रखा है। हिंसा में अब तक 34 लोगों की मौत हुई है और 1,300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। प्रदर्शन शुरू में सोशल मीडिया प्रतिबंधों के खिलाफ थे, लेकिन जल्दी ही हिंसक रूप ले लिया। संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट और कई नेताओं के घरों में आगजनी हुई, जिसके बाद प्रधानमंत्री और कई मंत्रियों को अपने पद छोड़ने पड़े।





