पीथमपुर हादसा: पिता क्रेन के नीचे दबे, बेटे को पुलिस ने भगा दिया – प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया असली वजह

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धार/इंदौर | धार जिले के पीथमपुर में रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के दौरान गुरुवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। एक भारी क्रेन पलटने से दो लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद मृतकों के परिवार ने रेलवे और प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

हादसे की कहानी: क्रेन पलटी, पिकअप चपेट में आया

सुबह करीब 9 बजे रेलवे का ओवरब्रिज निर्माण कार्य चल रहा था। क्रेन गर्डर उठा रही थी, तभी अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह पास से गुजर रहे पिकअप वाहन पर पलट गई। हादसे में पिकअप चालक अभय पाटीदार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि क्लीनर कल्याण परमार गंभीर रूप से घायल हो गए। कुछ देर बाद उन्होंने भी दम तोड़ दिया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कल्याण परमार की मौत मौके पर ही हो गई थी, लेकिन भीड़ को शांत करने के लिए प्रशासन ने उन्हें घायल बताकर अस्पताल भेजा।

बेटे का आरोप – “चार घंटे तक पापा दबे रहे, पुलिस ने मुझे भगा दिया”

मृतक कल्याण परमार के बेटे लोकेश परमार ने बताया –

“हादसा सुबह 9 बजे हुआ, लेकिन 11:30 बजे तक भी पापा को बाहर नहीं निकाला गया। जब मैं उन्हें निकालने गया तो पुलिस ने मुझे वहां से हटा दिया। रेलवे और प्रशासन ने रास्ता बंद नहीं कराया था। अगर सुरक्षा इंतजाम होते तो ये हादसा टल सकता था।”

उनके छोटे बेटे सतीश परमार ने कहा –

“पापा सुबह टायर लेने निकले थे, बोले थे जल्दी लौटकर साथ खाना खाएंगे। लेकिन वापस नहीं आए।”

प्रत्यक्षदर्शियों की बात – “जैक धंस गया, क्रेन खुद पलटी”

मौके पर मौजूद सोहेल खान ने बताया –

“यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। हादसे के चार घंटे बाद शव निकाला गया।”

रुबीना खान ने कहा –

“रेलवे अधिकारी मौके पर नहीं थे। क्रेन के नीचे लोहे की प्लेट नहीं लगाई गई थी, जिससे वजन बढ़ते ही मिट्टी धंस गई और क्रेन पलट गई।”

एडवोकेट राजेश चौधरी ने जोड़ा –

“क्रेन को लकड़ी की बल्लियों पर टिकाया गया था, जबकि उसे लोहे की प्लेट पर होना चाहिए था। मिट्टी नरम थी, यही असली वजह थी।”

पुलिस और रेलवे का बयान

एएसपी पारुल बेलापुरकर ने बताया कि क्रेन चालक और ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई है।

वहीं रेलवे पीआरओ खेमराज मीणा ने कहा –

“पिकअप वैन सुरक्षा बैरियर पार करते हुए क्रेन के सपोर्ट से टकरा गई, जिससे क्रेन असंतुलित होकर पलट गई। संबंधित फर्म पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है और जांच के आदेश दिए गए हैं।”

रेलवे ने यह भी दावा किया कि दो महीने पहले प्रशासन को रास्ता बंद करने के लिए पत्र भेजा गया था, लेकिन मार्ग बंद नहीं किया गया, जिससे लोग आते-जाते रहे और हादसा हुआ।

सवालों के घेरे में रेलवे की सुरक्षा

हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने रेलवे पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि निर्माण स्थल पर न तो बैरियर लगाया गया था, न ही कोई सुरक्षा अधिकारी मौजूद था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह हादसा पूरी तरह मानव लापरवाही का परिणाम है।

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