by: vijay nandan
पन्ना: मध्य प्रदेश के उत्तर-पूर्वी जिले पन्ना की हीरा खदानों में काम करने वाले लोग अपनी किस्मत बदलने की उम्मीद में कड़ी मेहनत के साथ-साथ कई तरह के टोटकों का भी सहारा लेते हैं। इन टोटकों में कुछ प्रथाएं महिलाओं के शोषण और उनके साथ अशोभनीय व्यवहार का कारण बनती हैं। हीरा खोजने वाले मजदूरों और ठेकेदारों में यह अंधविश्वास बहुत गहरा है कि कुछ खास टोटके करने से जमीन खुद हीरा उगलने लगेगी।
स्त्री-पुरुष मिलन का टोटका: सबसे चौंकाने वाला और ‘सबसे कारगर’ माना जाने वाला टोटका यह है कि सुबह के अंधेरे में या देवताओं के जागने से पहले खदान क्षेत्र में किसी महिला और पुरुष का संबंध हो, तो अगले कुछ दिनों में हीरा मिलने की संभावना बढ़ जाती है। खदान में काम करने वाली महिला मजदूरों को अक्सर इस टोटके का हिस्सा बनने के लिए मजबूर किया जाता है या पैसे का लालच दिया जाता है (₹500-₹1000)।

महिलाओं को काम से हटा दिए जाने के डर से, वे अक्सर इस शोषण को चुपचाप सहने के लिए मजबूर हो जाती हैं, जैसा कि एक मजदूर महिला ने बताया कि “जब होना ही है तो क्यों न चुपचाप सहा जाए”। लोबान जलाना, हीरे की चाल (कंकड़ों का ढेर जिससे हीरा छांटा जाता है) पर लोबान जलाकर पूजा करना एक सामान्य और “मासूम” टोटका है।
पुतला जलाना: काली नजर हटाने के लिए कभी-कभी पुतला भी जलाया जाता है।
मजदूर को घसीटना: जहां कंकड़ रखे होते हैं, वहां एक मजदूर को सुलाकर सात बार गोलाकार घसीटा जाता है। मजदूर चिल्लाता है कि “मिलेगा…मिलेगा!” इस प्रक्रिया में मजदूर के घायल होने का खतरा होता है, लेकिन हीरा मिलने की चाहत में ठेकेदार और मजदूर इसे सहते हैं।
खदानों में महिलाओं की स्थिति
पन्ना की हीरा खदानों में अन्य जगहों की तुलना में महिलाएं अधिक संख्या में काम करती हैं, खासकर हीरा छांटने (कंकड़ों में से हीरा चुनने) के काम में। एक ट्रस्ट की डायरेक्टर के अनुसार, हीरा खदानों में काम करने वाली महिलाएं अधिक संवेदनशील (Vulnerable) होती हैं। उन्हें पुरुषों से कम मजदूरी देकर आर्थिक शोषण का सामना करना पड़ता है। शारीरिक दुर्व्यवहार (Physical Abuse) की घटनाएं भी काफी ज्यादा हैं, हालांकि काम खोने के डर से कोई खुलकर नहीं बताता।

टोटकों में भागीदारी: महिलाओं को अक्सर इसलिए भी काम पर ज्यादा रखा जाता है क्योंकि एक अंधविश्वास के अनुसार, वे ‘तकदीर का ताला खोल सकती हैं’।
पन्ना में हीरा खनन के तरीके
पन्ना जिला मध्य प्रदेश के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित है और यहां तक अब तक कोई रेलवे लाइन नहीं पहुंची है। यहां हीरा खनन मुख्य रूप से तीन तरीकों से होता है:
उथली खदानें (Shallow Mines):
सरकार से लगभग ₹200 में पट्टा लेकर खनन किया जाता है।
यह 8×8 मीटर के टुकड़े होते हैं, जहां तय गहराई तक ही खुदाई की इजाजत होती है। (जैसे सरकोहा, सिरसवाहा)
मैकेनाइज्ड खनन (Mechanized Mining):
नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NMDC) जैसी सरकारी कंपनी द्वारा मशीनों के जरिए किया जाने वाला बड़े पैमाने का खनन।

अवैध खनन (Illegal Mining):
बृहस्पति कुंड और रुंझ नदी के किनारों पर जोखिम भरे तरीके से होने वाला खनन। हजारों लोग इस नदी के आसपास हीरे की खोज में डेरा डाले रहते हैं। कई लोगों को करोड़ों रुपये की लागत वाले हीरे मिल चुके हैं, लेकिन वे भी खनन का काम नहीं छोड़ते। किस्मत और उम्मीद, हीरा मिलने के बाद भी, कई मालिक अपनी जीवनशैली में बड़ा बदलाव नहीं लाते, बल्कि मिली रकम का उपयोग नए पट्टे खरीदने और और खुदाई के लिए करते हैं। मजदूरों का हिस्सा, बड़ा हीरा मिलने पर मजदूरों को इनाम (जैसे ₹10,000 सबको मिलाकर, कपड़े, या घूमने ले जाना) दिया जाता है। इस इनाम से उनका नाम होता है कि वे किस्मतवाले हैं, जिसके कारण उन्हें बार-बार काम पर बुलाया जाता है।
पत्थर खदानों की त्रासदी: हीरा खदानों के अलावा, जिले में पत्थर खदानें भी रोजगार का जरिया हैं। इन खदानों में काम करने वाले मजदूरों को सिलिकोसिस जैसी जानलेवा बीमारी हो जाती है, जिसमें फेफड़ों में पत्थर की धूल जमने से फेफड़े पत्थर जैसे हो जाते हैं।
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