रिपोर्ट : राकेश चांदवंशी
Pachmarhi : सतपुड़ा की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित प्राचीन चौरागढ़ शिव मंदिर इन दिनों शिवभक्तों के जयकारों से गुंजायमान है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आयोजित इस वार्षिक मेले में मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु महादेव के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर में चारों ओर ‘हर-हर महादेव’ की गूंज सुनाई दे रही है।

दुर्गम रास्तों पर भारी त्रिशूलों के साथ आस्था की परीक्षा
Pachmarhi चौरागढ़ की चढ़ाई अपनी कठिन और खड़ी सीढ़ियों के लिए जानी जाती है, लेकिन भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। श्रद्धालु अपनी मन्नतें पूरी होने पर भारी-भरकम लोहे के त्रिशूल अपने कंधों पर उठाकर शिखर तक ले जा रहे हैं। कड़ाके की ठंड और शारीरिक थकान के बावजूद, ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते भक्त महादेव के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं। मंदिर परिसर अब हजारों त्रिशूलों से भर चुका है, जो भक्तों के अटूट विश्वास का प्रतीक हैं।
प्रशासन की मुस्तैदी: बिछड़ों को अपनों से मिला रहा ‘खोया-पाया’ केंद्र
Pachmarhi भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और सहायता के पुख्ता इंतजाम किए हैं। मेले में अपनों से बिछड़ने वाले लोगों के लिए ‘खोया-पाया’ केंद्र वरदान साबित हो रहा है। हाल ही में सिवनी के 8 वर्षीय बालक शौर्य नायक और छिंदवाड़ा की आशा राठौर जैसे कई श्रद्धालु, जो भीड़ में अपने परिजनों से अलग हो गए थे, उन्हें पुलिस और कंट्रोल रूम की तत्परता से सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचाया गया।
त्रिकोणीय संगम: तीन राज्यों की संस्कृति और श्रद्धा का मिलन
Pachmarhi चौरागढ़ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की संस्कृतियों का अनूठा संगम बन गया है। विभिन्न अंचलों से आए श्रद्धालु अपनी क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं। प्रशासन और स्थानीय वॉलंटियर्स चौबीसों घंटे भक्तों की सुविधा और सुरक्षा के लिए पहाड़ी रास्तों से लेकर मुख्य मंदिर तक तैनात हैं।
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