भारत सरकार ने हाल ही में ‘ऑनलाइन गेमिंग प्रोत्साहन एवं विनियमन अधिनियम’ लागू करते हुए सभी तरह के ऑनलाइन मनी गेम्स और सट्टेबाजी पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले के बाद बैंक और फाइनेंशियल कंपनियों के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि इसे लागू कैसे किया जाए।
इसी को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से विस्तृत दिशानिर्देश मांगे गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, बैंकों ने कानून को लागू करने के लिए अतिरिक्त समय देने की भी मांग की है।
मीटिंग में क्या हुआ?
सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को वित्तीय सेवा विभाग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ एक अहम बैठक हुई, जिसमें इन बिंदुओं पर चर्चा की गई:
- कानून के प्रावधानों को विस्तार से समझना
- बैंकों और NBFCs (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां) द्वारा इसे कैसे लागू किया जाएगा
- संक्रमण काल की चुनौतियां और समाधान
- अनुपालन प्रणाली को मजबूत करने के लिए समयसीमा तय करना
एक अधिकारी के अनुसार, सभी बैंकों ने प्रतिबद्धता जताई, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि बिना RBI की स्पष्ट गाइडलाइन के सख्ती से लागू करना मुश्किल होगा।
कानून के तहत मुख्य प्रावधान
इस अधिनियम के तहत:
- बैंकों और फाइनेंशियल कंपनियों को ऑनलाइन मनी गेम्स के लिए लेन-देन की अनुमति नहीं होगी।
- ऐसे गेम्स से जुड़े विज्ञापन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे।
- नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना और जेल की सज़ा का प्रावधान है।
सज़ा और जुर्माने के प्रावधान
- विज्ञापन करने पर: 2 साल तक जेल + 50 लाख रुपये तक जुर्माना
- वित्तीय लेन-देन की सुविधा देने पर: 3 साल तक जेल + 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना
- बार-बार अपराध करने पर: 3–5 साल तक जेल + 2 करोड़ रुपये तक जुर्माना
ऑनलाइन कंपनियों का कदम
सरकारी फैसले को देखते हुए देश की कई बड़ी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने पहले ही अपनी सेवाएं बंद करने की घोषणा कर दी है।
लेकिन सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती है:
विदेशी ऑनलाइन मनी गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह रोक लगाना।
कितने लोगों को हुआ नुकसान?
एक अनुमान के मुताबिक:
- देश में करीब 45 करोड़ लोग ऑनलाइन मनी गेमिंग के आदी हैं।
- पिछले एक साल में खिलाड़ियों ने लगभग 20,000 करोड़ रुपये गंवा दिए।
- आत्महत्या और आर्थिक नुकसान के मामलों में लगातार इजाफा हुआ, जिसके बाद सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया।
ऑनलाइन मनी गेमिंग पर बैन भारत सरकार की ओर से लिया गया एक बड़ा फैसला है, जिसका सीधा असर खिलाड़ियों, बैंकों और गेमिंग कंपनियों पर पड़ेगा। अब सभी की निगाहें RBI की विस्तृत गाइडलाइन पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि बैंकों और फाइनेंशियल कंपनियों को इस कानून को कैसे लागू करना होगा।