श्रद्धालुओं का सैलाब और व्यवस्थाओं की चुनौती
Omkareshwar ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर में मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर आस्था का विशाल जनसैलाब देखने को मिला। देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु नर्मदा स्नान और भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन के लिए पहुंचे। नर्मदा नदी के घाटों पर तड़के सुबह से ही भीड़ बढ़ती चली गई। उज्जैन महाकाल लोक से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचे, जिससे व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिला।

घाट, पार्किंग और मूलभूत सुविधाओं की कमी
Omkareshwar निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि नर्मदा घाटों पर नावों के लिए अलग और सुरक्षित घाट की व्यवस्था नहीं है। कई स्थानों पर पक्के घाट न होने के कारण श्रद्धालु चट्टानों पर खड़े होकर स्नान करते नजर आए, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। उदघोषणा के बावजूद श्रद्धालुओं तक स्पष्ट निर्देश नहीं पहुंच पा रहे हैं। प्रमुख स्थानों पर दिशा-निर्देश और चेतावनी वाले साइन बोर्डों की भी कमी देखी गई। मंदिर दर्शन के दौरान सुलभ शौचालयों और अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव में श्रद्धालु परेशान होते दिखाई दिए।

सिंहस्थ 2028 की योजनाएं, लेकिन वर्तमान में परेशानी
Omkareshwar प्रशासन द्वारा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के प्रयास किए गए, इसके बावजूद छिटपुट घटनाएं सामने आईं। सिंहस्थ 2028 की कार्ययोजना में घाटों के विस्तार, सर्वसुविधायुक्त मल्टी पार्किंग, मंदिर गर्भगृह विकास सहित कई कार्य प्रस्तावित हैं, लेकिन फिलहाल जमीनी स्तर पर मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी महसूस की जा रही है। श्रद्धालुओं का कहना है कि जब तक स्थायी और सुरक्षित व्यवस्थाएं नहीं बनतीं, तब तक ऐसे बड़े पर्वों पर जोखिम बना रहेगा।
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