ओडिशा के बालासोर में एक कॉलेज छात्रा द्वारा आत्मदाह किए जाने के बाद प्रदेश की सियासत में भारी उबाल आ गया है। घटना के विरोध में आज 17 जुलाई 2025 को विपक्षी दलों ने ओडिशा बंद का ऐलान किया है। इस बंद के दौरान पूरे राज्य में स्कूल-कॉलेज बंद रहने की संभावना है, और प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं।
🔥 क्या है बालासोर आत्मदाह कांड?
- पीड़िता: फकीर मोहन (स्वायत्त) कॉलेज की बीएड द्वितीय वर्ष की छात्रा
- घटना: यौन उत्पीड़न के आरोपी प्रोफेसर पर कार्रवाई न होने से नाराज़ होकर छात्रा ने कॉलेज परिसर में खुद को आग लगा ली।
- मृत्यु: तीन दिन इलाज के बाद एम्स भुवनेश्वर में छात्रा की मौत हो गई।
- आरोप: कार्रवाई न करने पर प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया गया है।
🧨 बीजेडी का उग्र प्रदर्शन, पुलिस से झड़प
बालासोर की घटना को लेकर बीजेडी (BJD) ने भुवनेश्वर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान:
- प्रदर्शनकारियों ने राज्य सचिवालय की ओर मार्च किया।
- लोअर पीएमजी स्क्वायर पर पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हुई।
- पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
- स्थिति बेकाबू होते देख कई बीजेडी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।
🩹 पूर्व मंत्री घायल, निगरानी में ड्रोन
प्रदर्शन के दौरान दो पूर्व मंत्री भी घायल हो गए:
- प्रणब प्रकाश दास
- प्रीति रंजन घराई
पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया और सचिवालय के रास्तों पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
📞 राहुल गांधी का पीड़िता के पिता को समर्थन
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीड़िता के पिता से फोन पर बात कर समर्थन जताया। उन्होंने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:
“इस बहादुर बेटी की लड़ाई पूरे समाज की लड़ाई है। कांग्रेस और मैं इस परिवार के साथ हैं। उन्हें न्याय दिलाकर ही रहेंगे।”
📢 विपक्षी एकजुट, बंद को मिला भारी समर्थन
बालासोर आत्मदाह कांड पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस समेत 8 विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से ओडिशा बंद का आह्वान किया है। इसका असर राज्य के कई जिलों में देखा जा रहा है:
- सड़कें वीरान
- बाजार बंद
- स्कूल-कॉलेजों में ताला
- जनजीवन प्रभावित
🛑 क्या कहते हैं आम लोग?
लोगों में आक्रोश है कि एक छात्रा को यौन शोषण का सामना करने के बाद भी न्याय नहीं मिला। लोग सवाल उठा रहे हैं:
- आरोपी प्रोफेसर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- कॉलेज प्रशासन की भूमिका क्या रही?
- सरकार इतनी देर से क्यों जागी?
🧠 विश्लेषण: यह सिर्फ एक आत्मदाह नहीं, समाज की चेतावनी है
इस घटना ने पूरे ओडिशा को झकझोर कर रख दिया है। एक छात्रा ने जब सिस्टम से हार मानकर खुद को आग लगा ली, तो यह केवल उसकी व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज की न्याय व्यवस्था पर सवाल है। युवाओं में असंतोष गहरा रहा है, और प्रशासन को तुरंत प्रभाव से पारदर्शी जांच और कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
📌 निष्कर्ष: क्या बदलेगा कुछ?
ओडिशा बंद के बाद सरकार पर दबाव है कि वह:
- पीड़िता के परिवार को न्याय दिलाए
- आरोपी को तुरंत गिरफ्तार करे
- भविष्य में इस तरह की घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करे
वक्त है कि यह घटना सिर्फ विरोध-प्रदर्शन तक सीमित न रह जाए, बल्कि इससे बदलाव की शुरुआत हो।