BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान संघर्ष के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। विदेश मंत्रालय ने उन तमाम अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिकी नौसेना ईरान पर सैन्य कार्यवाही के लिए भारतीय समुद्री ठिकानों का इस्तेमाल कर रही है। भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह से ‘बेबुनियाद और मनगढ़ंत’ करार दिया है।
अमेरिकी पूर्व कर्नल के सनसनीखेज दावे का सच
New Delhi विवाद की शुरुआत अमेरिकी सेना के पूर्व कर्नल डगलस मैकग्रेगर के एक इंटरव्यू से हुई। उन्होंने ‘वन अमेरिका न्यूज नेटवर्क’ (OANN) को दिए साक्षात्कार में दावा किया था कि अमेरिकी नौसेना का बुनियादी ढांचा भारी नुकसान झेल चुका है, जिसके कारण अमेरिका अब ईरान के खिलाफ ऑपरेशन चलाने के लिए भारतीय बंदरगाहों पर निर्भर है। उन्होंने तर्क दिया था कि क्षेत्र में अमेरिकी बेस तबाह होने की वजह से भारत के पोर्ट्स का सहारा लेना उनकी मजबूरी बन गई है।
विदेश मंत्रालय की ‘फैक्ट चेक’ यूनिट ने दी चेतावनी
New Delhi इन दावों के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही भारतीय विदेश मंत्रालय सक्रिय हो गया। मंत्रालय की आधिकारिक फैक्ट चेक यूनिट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर स्पष्ट किया कि इस तरह की खबरें पूरी तरह से फर्जी और निराधार हैं। सरकार ने जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह किया है कि भारत की भूमिका को लेकर फैलाए जा रहे इस तरह के भ्रामक प्रोपेगेंडा से सावधान रहें। भारत ने साफ किया है कि वह अपनी संप्रभुता और विदेशी नीति के सिद्धांतों पर अडिग है।
ईरान-इजरायल संघर्ष की वर्तमान स्थिति
New Delhi गौरतलब है कि 28 फरवरी, 2026 से अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल डिपो और परमाणु कार्यक्रमों को निशाना बनाकर संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया है। इस ऑपरेशन का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना बताया जा रहा है। हालांकि, युद्ध की अनिश्चित समयसीमा और बदलते लक्ष्यों के कारण यह संघर्ष लंबा खिंचने की आशंका जताई जा रही है, जिससे वैश्विक राजनीति में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है।





