NCH Homeopathy : होम्योपैथी चिकित्सकों के पक्ष में राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग का अहम कदम
NCH Homeopathy : इंदौर, 8 जून। राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (NCH) के बोर्ड ऑफ एथिक्स एंड रजिस्ट्रेशन फॉर होम्योपैथी (BERH) द्वारा जारी हालिया परिपत्र का देशभर के होम्योपैथिक चिकित्सकों ने स्वागत किया है। परिपत्र में होम्योपैथी एवं पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों के विरुद्ध अपमानजनक, भ्रामक एवं मानहानिकारक वक्तव्यों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए ऐसे कृत्यों को रोकने के निर्देश दिए गए हैं। इंदौर के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक एवं समाजसेवी डॉ. ए.के. द्विवेदी ने इस परिपत्र को राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग का एक सराहनीय एवं समयोचित कदम बताया है। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी भारत में विधिक रूप से मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति है और पंजीकृत चिकित्सकों को कानून द्वारा चिकित्सा अभ्यास का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में बिना आधार के होम्योपैथी या उसके चिकित्सकों के विरुद्ध की जाने वाली टिप्पणियां न केवल भ्रामक हैं, बल्कि पेशे की गरिमा को भी ठेस पहुंचाती हैं। डॉ. द्विवेदी ने कहा कि आयोग द्वारा जारी यह परिपत्र उन लोगों के लिए स्पष्ट संदेश है जो बिना तथ्यात्मक आधार के होम्योपैथी के विरुद्ध बयानबाजी करते हैं। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से देशभर के होम्योपैथिक चिकित्सकों में अत्यंत प्रसन्नता और उत्साह का वातावरण है तथा चिकित्सकों को यह विश्वास मिला है कि उनकी वैधानिक एवं पेशेवर गरिमा की रक्षा के लिए आयोग प्रतिबद्ध है। उन्होंने आयोग की अध्यक्ष डॉ. हरचरणजीत कौर एवं राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कदम होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के सम्मान, विश्वसनीयता और जनविश्वास को और सुदृढ़ करेगा।
NCH Homeopathy : दिनांक 08 जून 2026 को राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (NCH) के Board of Ethics and Registration in Homoeopathy (BERH) द्वारा जारी इस परिपत्र में कहा गया है कि :

- होम्योपैथी भारत में विधिक रूप से मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति है तथा राष्ट्रीय या राज्य रजिस्टर में पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों को विधि अनुसार चिकित्सा अभ्यास का अधिकार प्राप्त है।
- आयोग ने संज्ञान लिया है कि प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया तथा अन्य माध्यमों से होम्योपैथी और उसके पंजीकृत चिकित्सकों के विरुद्ध अपमानजनक, मानहानिकारक, भ्रामक एवं निराधार टिप्पणियाँ की जा रही हैं।
- किसी भी सरकारी दस्तावेज, एफआईआर, प्रेस विज्ञप्ति, सोशल मीडिया पोस्ट, वेबसाइट सामग्री अथवा सार्वजनिक बयान में पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों को “क्वैक (झोलाछाप)” कहना भ्रामक एवं मानहानिकारक माना जाएगा तथा यह उनके संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।
- सभी संस्थानों, अधिकारियों एवं संबंधित पक्षों को सलाह दी गई है कि वे होम्योपैथी एवं उसके चिकित्सकों के संबंध में सार्वजनिक वक्तव्य देते समय सावधानी बरतें तथा ऐसी भाषा का प्रयोग न करें जो भ्रामक, अपमानजनक या पूर्वाग्रहपूर्ण हो।
- यदि किसी व्यक्तिगत चिकित्सक के आचरण को लेकर शिकायत या संदेह हो तो उसका निपटारा संबंधित वैधानिक, नियामक, अनुशासनात्मक अथवा कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाए, न कि पूरे होम्योपैथी पेशे या सभी चिकित्सकों को लक्षित करके।
- राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह होम्योपैथी पेशे की गरिमा, अखंडता एवं वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और होम्योपैथी अथवा उसके पंजीकृत चिकित्सकों को अनुचित रूप से बदनाम करने के प्रयासों के विरुद्ध विधि अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष:
यह परिपत्र स्पष्ट करता है कि पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों को “झोलाछाप” कहना या होम्योपैथी के विरुद्ध निराधार एवं अपमानजनक टिप्पणियाँ करना अनुचित है। किसी भी शिकायत का समाधान निर्धारित कानूनी एवं नियामक प्रक्रिया के माध्यम से ही किया जाना चाहिए।





