भोपाल, 1 अप्रैल 2025: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आज एक बड़ा ऐलान करते हुए राज्य के ‘सीएम राइज स्कूल’ का नाम बदलकर “सांदीपनि स्कूल” कर दिया। यह निर्णय ‘स्कूल चलें हम अभियान-2025’ के तहत भोपाल के शासकीय नवीन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में लिया गया।
क्यों बदला गया नाम?
- ऋषि सांदीपनि के नाम पर: नए नाम का चयन भगवान कृष्ण के गुरु ऋषि सांदीपनि के सम्मान में किया गया है, जो प्राचीन भारतीय शिक्षा परंपरा के प्रतीक माने जाते हैं।
- पूर्ववर्ती सरकार की योजना का नाम हटाना: ‘सीएम राइज स्कूल’ नाम पिछली सरकार (शिवराज सरकार) द्वारा शुरू की गई योजना थी, जिसे अब बदल दिया गया है।
- शिक्षा के प्रतीक के रूप में: सरकार का कहना है कि यह नाम गुरु-शिष्य परंपरा और भारतीय ज्ञान प्रणाली को समर्पित है।
क्या है ‘सीएम राइज स्कूल’ योजना?
- इस योजना के तहत राज्य के सरकारी स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल शिक्षा से लैस किया जाना था।
- अब इन स्कूलों को “सांदीपनि स्कूल” के नाम से जाना जाएगा, लेकिन योजना के उद्देश्य वही रहेंगे।

लोगों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
✅ समर्थन में:
- कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि यह नाम भारतीय संस्कृति और शिक्षा के मूल्यों को दर्शाता है।
- सरकारी शिक्षक संघ ने कहा कि नाम से फर्क नहीं पड़ता, शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
❌ आलोचना:
- विपक्षी दलों का कहना है कि नाम बदलने से शिक्षा व्यवस्था में कोई सुधार नहीं होगा, बल्कि धन का दुरुपयोग है।
- कुछ अभिभावकों का मानना है कि सरकार को नाम बदलने के बजाय शिक्षकों की कमी और स्कूलों की हालत सुधारने पर काम करना चाहिए।
आगे की योजना
- सरकार ने कहा कि “सांदीपनि स्कूल” अब छात्रों को बेहतर शिक्षा, स्मार्ट क्लासेज और कौशल विकास के अवसर प्रदान करेंगे।
- इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों को भी अपग्रेड करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा महत्वपूर्ण घोषणा
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) April 1, 2025
"महर्षि सांदीपनि के नाम से जाने जाएंगे सीएम राइज स्कूल"@DrMohanYadav51 @schooledump #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh #SchoolChalehumMP #PraveshutsavMP pic.twitter.com/rtzHWrxLmr
अभी कितने सीएम राइज स्कूल हैं?
अभी तक मध्य प्रदेश में 274 सीएम राइज स्कूल शुरू हो चुके हैं। ये स्कूल मौजूदा शैक्षणिक साल से चल रहे हैं। इन स्कूलों में बच्चों को नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की सुविधा मिलती है। इन स्कूलों को बनाने में सरकार ने बहुत मेहनत की है। हर स्कूल में अच्छे टीचर, किताबें और तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे बच्चों का पढ़ाई में मन लगता है।
कितने स्कूल बनाने की योजना है?
मध्य प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि पूरे राज्य में 9200 सीएम राइज स्कूल बनाए जाएं। यह बहुत बड़ा लक्ष्य है। सरकार चाहती है कि हर इलाके में एक अच्छा स्कूल हो। इन स्कूलों को चरणों में बनाया जाएगा। पहले चरण में 360 स्कूल बनाने का प्लान था,जो 2024 तक तैयार होेने थे। बाकी स्कूल 2031 तक पूरे होंगे। हर स्कूल को बनाने में 18 से 21 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह पैसा बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए लगाया जा रहा है।
योजना के चरण और प्रगति
सीएम राइज स्कूल योजना को कई चरणों में पूरा किया जा रहा है। पहले चरण में 360 स्कूलों पर काम चल रहा है। इनमें से कुछ स्कूलों का निर्माण शुरू हो चुका है। 2022 में इंदौर में 69 स्कूलों की नींव रखी गई थी। सरकार का कहना है कि ये स्कूल प्राइवेट स्कूलों से भी अच्छे होंगे। हर स्कूल में 10 से 15 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले बच्चे पढ़ सकेंगे। इसके लिए बस की व्यवस्था भी होगी।
इन स्कूलों की खासियत क्या है?
सीएम राइज स्कूल आम स्कूलों से अलग हैं। इनमें कई खास सुविधाएं हैं। जैसे कि:
- स्मार्ट क्लासरूम: बच्चों को डिजिटल तरीके से पढ़ाया जाता है।
- लैब और लाइब्रेरी: विज्ञान और किताबों के लिए अच्छी व्यवस्था है।
- खेल की सुविधा: जिम, स्विमिंग पूल और खेल का मैदान होगा।
- बस सुविधा: बच्चों को घर से स्कूल लाने-ले जाने के लिए बसें होंगी।
- अच्छे टीचर: हर स्कूल में प्रशिक्षित शिक्षक होंगे।
इन सुविधाओं से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास होगा। साथ ही, वे पढ़ाई में आगे बढ़ सकेंगे।
सरकार का मकसद क्या है?
मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि सीएम राइज स्कूल एक सामाजिक क्रांति लाएंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि ये स्कूल बच्चों के सपनों को पूरा करेंगे। उनका मानना है कि शिक्षा से ही देश आगे बढ़ सकता है। सरकार चाहती है कि गरीब से गरीब बच्चा भी अच्छी पढ़ाई कर सके। इसके लिए माता-पिता और टीचरों की भी मदद ली जा रही है।
चुनौतियां और समाधान
इतने सारे स्कूल बनाना आसान नहीं है। इसके लिए बहुत पैसा और मेहनत चाहिए। कुछ इलाकों में जमीन की कमी भी हो सकती है। लेकिन सरकार ने इसके लिए योजना बनाई है। वे निजी कंपनियों और संगठनों से भी मदद ले रही है। साथ ही, टीचरों को ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि वे बच्चों को अच्छे से पढ़ा सकें।
लोगों की राय
लोगों को यह योजना बहुत पसंद आ रही है। माता-पिता खुश हैं कि उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी। कुछ लोग कहते हैं कि सरकार को पहले पुराने स्कूलों को ठीक करना चाहिए। लेकिन ज्यादातर लोग मानते हैं कि यह योजना बच्चों के लिए फायदेमंद है।