संवाददाता- प्रताप सिंह बघेल
Morena Youth Dandwat Yatra MP मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से विकास के दावों की पोल खोलती एक बेहद भावुक और हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। दिमनी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम ‘घेर का पुरा-सीतापुर’ में आजादी के दशकों बाद भी पक्की सड़क न बनने से नाराज एक युवक ने विरोध का अनोखा और बेहद कड़ा रास्ता चुना है। गांव के कीचड़ और दलदल भरे रास्तों से त्रस्त होकर नवीन तोमर नाम के युवक ने अपने गांव से स्थानीय बीजेपी सांसद शिवमंगल सिंह तोमर के निवास स्थान तक करीब 15 किलोमीटर लंबी ‘दंडवत यात्रा’ शुरू कर दी है। युवक का यह आंदोलन पूरे चंबल अंचल में इस समय भारी चर्चा का विषय बना हुआ है।

Morena Youth Dandwat Yatra MP दिल्ली की प्राइवेट नौकरी छोड़ गांव लौटा युवक, बच्चों की रुकी पढ़ाई तो आ गया गुस्सा
Morena Youth Dandwat Yatra MP जानकारी के अनुसार, लगातार हो रही बारिश के कारण घेर का पुरा-सीतापुर गांव की मुख्य सड़क पूरी तरह दलदल में तब्दील हो चुकी है। हालात इतने बदतर हैं कि पिछले तीन दिनों से स्कूल जाने वाले मासूम बच्चे घरों में कैद हैं और शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। गांव की इस बदहाली और अपनों की लाचारी को देखकर दिल्ली में एक निजी कंपनी में कार्यरत नवीन तोमर अपनी नौकरी छोड़कर गांव लौट आया। जब जनप्रतिनिधियों ने सुध नहीं ली, तो उसने प्रशासन और नेताओं को नींद से जगाने के लिए खुद को कष्ट देकर दंडवत यात्रा पर निकलने का फैसला किया।
Morena Youth Dandwat Yatra MP ‘चुनावी वादा भूल गए सांसद’: एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच पा रही गांव, मरीजों की जान आफत में

दंडवत यात्रा कर रहे नवीन तोमर और स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी सांसद शिवमंगल सिंह तोमर ने गांव में पक्की सड़क बनवाने का पुरजोर वादा किया था। मगर चुनाव जीतने और संसद पहुंचने के बाद वे अपने वादे को पूरी तरह भूल गए। बारिश के इस मौसम में गांव का संपर्क मुख्य मार्ग (जौहां-श्यामपुर मार्ग) से पूरी तरह कट चुका है। स्थिति इतनी गंभीर है कि किसी मरीज के गंभीर होने पर एम्बुलेंस तक गांव के भीतर नहीं आ पाती, जिससे लोगों की जान पर बन आती है।
Morena Youth Dandwat Yatra MP ‘मेरे मरने के बाद तो लाखों आएंगे, तब बनेगी सड़क’— युवक के दर्द से भरा अनोखा आंदोलन
सड़क पर रेंगते हुए और बारिश में भीगते हुए दंडवत यात्रा कर रहे नवीन ने बेहद भावुक लहजे में कहा, “शायद मेरे जीते-जी इस गांव को पक्की सड़क नसीब नहीं होगी। लेकिन जब मैं मर जाऊंगा, तो मेरे अंतिम संस्कार में लाखों लोग यहां आएंगे और तब प्रशासन को मजबूरन यहां सड़क बनानी पड़ेगी। मुझे खुशी होगी कि मेरा जीवन कम से कम मेरे गांव वालों के काम आ सकेगा।” नवीन का कहना है कि वह हार नहीं मानेगा और 15 किलोमीटर का यह सफर इसी तरह तय कर सांसद को उनका चुनावी घोषणापत्र याद दिलाएगा। उधर, ग्रामीणों ने भी चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो यह आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।





