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Mohan Bhagwat का बड़ा विदेश दौरा, 25 अगस्त से अमेरिका-कनाडा और UK जाएंगे RSS प्रमुख

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Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जल्द ही तीन अहम पश्चिमी देशों की यात्रा पर जाने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक, भागवत 25 अगस्त 2026 से अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम (UK) के दौरे पर रहेंगे। यह विदेश यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब RSS अपने शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों से गुजर रहा है।

भागवत की यह यात्रा विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों और वहां सक्रिय विभिन्न संघ संगठनों के साथ संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बताया गया है कि इन देशों में मौजूद स्थानीय संघों और भारतीय समुदाय से जुड़े संगठनों की ओर से मिले निमंत्रण के बाद यह दौरा तय हुआ है।

Mohan Bhagwat: 25 अगस्त से शुरू होगा विदेश दौरा

RSS प्रमुख की यात्रा 25 अगस्त से शुरू होने की जानकारी सामने आई है। इस दौरान वह अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जाएंगे। यात्रा के दौरान अलग-अलग स्थानों पर भारतीय मूल के लोगों, संघ से जुड़े स्थानीय संगठनों और अन्य प्रतिनिधियों के साथ संवाद होने की संभावना है।

हालांकि, भागवत के विदेश दौरे का विस्तृत कार्यक्रम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। RSS की ओर से कहा गया है कि यात्रा से जुड़े कार्यक्रमों और अन्य जानकारियों की घोषणा बाद में की जाएगी।

Mohan Bhagwat: RSS के शताब्दी वर्ष में हो रहा दौरा

मोहन भागवत का यह दौरा RSS के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि संगठन इस समय अपने शताब्दी वर्ष से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। ऐसे में विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ संवाद को संगठन की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और भारतीय मूल के लोगों से संपर्क के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

अमेरिका, कनाडा और UK में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं। इन देशों में भारतीय संस्कृति, सामाजिक गतिविधियों और समुदाय से जुड़े कई संगठन भी सक्रिय हैं। भागवत की यात्रा के दौरान इन्हीं संगठनों और प्रतिनिधियों से मुलाकात की संभावना जताई गई है।

Mohan Bhagwat: सुनील आंबेकर ने दी दौरे की जानकारी

RSS के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए भागवत की विदेश यात्रा की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि RSS के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 25 अगस्त 2026 से अमेरिका, कनाडा और UK का दौरा करेंगे।

आंबेकर के मुताबिक, यह यात्रा विदेशों में मौजूद स्थानीय संघों और अन्य संगठनों के निमंत्रण पर हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि यह दौरा RSS के चल रहे शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित किया जा रहा है।

Mohan Bhagwat: भारतीय मूल के लोगों से संवाद पर रहेगा जोर

भागवत की यात्रा के दौरान भारतीय मूल के लोगों के साथ संवाद को प्रमुखता मिलने की उम्मीद है। अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में भारतीय समुदाय की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां काफी व्यापक हैं। ऐसे में RSS प्रमुख इन समुदायों से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा कर सकते हैं।

स्थानीय संघ संगठनों की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में भी भागवत के शामिल होने की संभावना है। हालांकि, किन शहरों में कौन-कौन से कार्यक्रम होंगे, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

Mohan Bhagwat: Gen-Z और Gen-Alpha पर पहले भी बोल चुके हैं भागवत

विदेश यात्रा से पहले मोहन भागवत युवाओं के मुद्दों पर भी अपनी बात रख चुके हैं। हाल ही में मुंबई में ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ (IIMUN) के 15 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने Gen-Z और Gen-Alpha के साथ संवाद किया था।

इस दौरान उन्होंने नई पीढ़ी के सोचने और सवाल पूछने के तरीके पर अपनी बात रखी। भागवत ने कहा था कि आज की युवा पीढ़ी चीजों को केवल स्वीकार करने के बजाय उनके पीछे का तर्क जानना चाहती है। उनके मुताबिक, युवाओं को सवालों के तार्किक जवाब और संवाद के साथ अपनापन भी चाहिए।

Mohan Bhagwat: लोकतंत्र में संवाद और असहमति को बताया जरूरी

युवाओं से बातचीत के दौरान भागवत ने लोकतंत्र में असहमति और विचार-विमर्श की भूमिका पर भी चर्चा की थी। उन्होंने कहा था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध को केवल टकराव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह बेहतर सहमति बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।

उन्होंने आंदोलनों के उद्देश्य पर भी अपनी राय रखी और कहा कि किसी भी आंदोलन का लक्ष्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में होना चाहिए। भागवत ने युवाओं की सोच और उनके सवाल पूछने की प्रवृत्ति को लोकतांत्रिक संवाद के लिए महत्वपूर्ण बताया।

Mohan Bhagwat: Gen-Z और Gen-Alpha को लेकर क्या बोले थे भागवत

भागवत ने अपने संबोधन में कहा था कि उनकी पीढ़ी के समय युवा आमतौर पर बड़ों की बात को बिना सवाल किए स्वीकार कर लेते थे। इसके विपरीत आज Gen-Z और Gen-Alpha के युवा सवाल करते हैं और किसी बात को समझने के लिए उसका तर्क जानना चाहते हैं।

उन्होंने कहा था कि नई पीढ़ी के साथ संवाद के लिए केवल निर्देश देना पर्याप्त नहीं है। उनके सवालों का तर्कपूर्ण जवाब देना और उनके साथ सहज संवाद बनाए रखना जरूरी है। भागवत ने लोकतांत्रिक बहस की तुलना भारतीय परंपरा के ‘शास्त्रार्थ’ से भी की थी, जिसमें अलग-अलग पक्ष अपने विचार रखते हैं।

Mohan Bhagwat: विदेश यात्रा को लेकर बढ़ी राजनीतिक और सामाजिक दिलचस्पी

RSS के शताब्दी वर्ष के दौरान मोहन भागवत की अमेरिका, कनाडा और UK यात्रा को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी दिलचस्पी बढ़ गई है। तीनों देशों में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी मौजूदगी है और यहां भारतीय समुदाय से जुड़े कई सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन सक्रिय हैं।

ऐसे में भागवत की यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय से जुड़े मुद्दों, संगठनात्मक गतिविधियों और सामाजिक विषयों पर संवाद होने की संभावना है। फिलहाल RSS की ओर से यात्रा के विस्तृत कार्यक्रम का इंतजार किया जा रहा है।

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