रिपोर्ट: राजेश पंवार
Maheshwar महेश्वर के ग्राम आशापुर से आज शुक्रवार, 6 फरवरी को पंचकोसी पदयात्रा का भव्य आगाज़ हुआ। सुबह 9 बजे माँ आशापुरी की विशेष आरती और ध्वज वंदन के साथ श्रद्धालुओं का जत्था जामगेट की ओर रवाना हुआ। यह यात्रा भक्ति के साथ-साथ स्वच्छता के संकल्प को भी साथ लेकर चल रही है।

यात्रा का मार्ग और पड़ाव (5 दिवसीय कार्यक्रम)
Maheshwar श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यात्रा को पांच दिनों में इस प्रकार विभाजित किया गया है:
- प्रथम दिन (6 फरवरी): आशापुर से शुरू होकर सुल्याखेड़ी के हनुमान मंदिर पर प्रथम रात्रि विश्राम।
- द्वितीय दिन (7 फरवरी): ऐतिहासिक जामगेट पहुँचकर माँ विंध्यवासिनी पार्वती के दर्शन और विश्राम।
- तृतीय दिन (8 फरवरी): नाग मंदिर (गुलावड़) और कुंडिया होते हुए उमियाधाम करोंदिया आगमन।
- च चतुर्थ दिन (9 फरवरी): धरगांव और मंडलेश्वर से होते हुए महेश्वर के राजराजेश्वर मंदिर पहुँचेंगे।
- पंचम दिन (10 फरवरी): महेश्वर नगर भ्रमण के बाद वापस आशापुर में महाभंडारे के साथ समापन।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व
Maheshwar यात्रा के संचालक महादेव पाटीदार और गोपाल मानवे के अनुसार, इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म और पुरातन संस्कृति की रक्षा करना है। यात्रा के दौरान निरंतर भजन-कीर्तन, नर्मदाष्टक और शिवाष्टक का पाठ किया जाएगा। श्रीराजराजेश्वर अन्न क्षेत्र के सेवादार ब्रजलाल सोनेर मुख्य ध्वज वाहक के रूप में जत्थे का नेतृत्व कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं
Maheshwar फरवरी की ठंड को देखते हुए समिति ने यात्रियों को गर्म कपड़े साथ रखने की सलाह दी है। मार्ग में जगह-जगह नर्मदा भक्तों द्वारा स्वल्पाहार और भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई है। साथ ही, प्रशासन के नियमों का पालन करने और मार्ग में स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है।
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