Madhya Pradesh मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की कृषि विकास दर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना पेश की है। पिछले दशक में 16% से अधिक की वार्षिक विकास दर हासिल करने के बाद, अब राज्य सरकार का लक्ष्य खेती को महज परंपरा से हटाकर एक ‘लाभकारी व्यवसाय’ में बदलना है। इसी संकल्प के साथ वर्ष 2026 को पूरे प्रदेश में ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा।
अनुसंधान और तकनीक से मिलेगी फसलों को वैश्विक पहचान
Madhya Pradesh खेती को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने के लिए सरकार राज्य की विशिष्ट फसलों पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके तहत तीन प्रमुख अनुसंधान केंद्रों की आधारशिला रखी जा रही है:
- श्रीअन्न अनुसंधान केंद्र (डिंडौरी): मिलेट्स के उत्पादन और पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए।
- सरसों अनुसंधान केंद्र (ग्वालियर): सरसों की गुणवत्ता और पैदावार में वृद्धि के लिए।
- चना अनुसंधान केंद्र (उज्जैन): चने की खेती को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए।
इसके साथ ही, मौसम की अनिश्चितताओं से निपटने के लिए ‘विंडस’ (WINDAS) प्रणाली विकसित की जा रही है, जो किसानों के मोबाइल पर सटीक मौसम पूर्वानुमान और कृषि सलाह (Agri-Advisory) सीधे उपलब्ध कराएगी।
’10-दिशात्मक रणनीति’ और नवाचारों का रोडमैप
Madhya Pradesh मुख्यमंत्री ने कृषक कल्याण वर्ष को प्रभावी बनाने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है, जिसे 10 प्रमुख आयामों में विभाजित किया गया है:
- प्राकृतिक खेती: ‘प्राकृतिक मध्यप्रदेश’ मिशन के जरिए रसायन मुक्त खेती को प्रोत्साहन।
- फसल विविधीकरण: आलू, प्याज और टमाटर जैसी फसलों के लिए ‘प्राइस स्टेबिलाइज़ेशन’ (मूल्य स्थिरीकरण) ताकि दाम गिरने पर भी किसान सुरक्षित रहें।
- संसाधन प्रबंधन: ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप 2.0’ और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष जोर।
- अपशिष्ट से ऊर्जा: पराली और कृषि कचरे से ऊर्जा बनाने के लिए 10 कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट की स्थापना।
- ग्लोबल ब्रांडिंग: ‘MP ग्लोबल एग्री ब्रांडिंग’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को विश्व बाजार तक पहुँचाना।
संस्थागत सुधार और वैश्विक अध्ययन के नए अवसर
Madhya Pradesh किसानों के कौशल विकास के लिए सरकार ‘विदेश अध्ययन भ्रमण योजना’ को पुनः प्रारंभ कर रही है। इसके तहत प्रगतिशील किसान और अधिकारी दुनिया की आधुनिकतम कृषि तकनीकों को सीखने विदेश जा सकेंगे।
- सुरक्षा कवच: सरकार ने मौसम आधारित बीमा योजना का विस्तार करते हुए इसमें अब उद्यानिकी (Horticulture) फसलों को भी शामिल कर लिया है।
- रोजगार और पारदर्शिता: कृषि विभाग और मंडी बोर्ड में रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी, वहीं AI और QR कोड आधारित ‘फार्म ट्रेसेबिलिटी’ के जरिए पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।





