Report: Vandna Rawat
Lucknow भारतीय सिनेमा के इतिहास में पहली बार पूरी तरह से गौमाता को समर्पित फिल्म ‘गोदान’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। यह फिल्म केवल एक कहानी नहीं, बल्कि भारतीय जीवन पद्धति और सनातन धर्म के उन मूल्यों को उजागर करती है, जो सदियों से हमारी पहचान रहे हैं। फिल्म के प्रचार प्रभारी शांतनु शुक्ला के अनुसार, ‘गोदान’ दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेगी।
आधुनिक विज्ञान और परंपराओं का सामंजस्य
Lucknow फिल्म ‘गोदान’ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह गौमाता के महत्व को केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी सिद्ध करती है। शांतनु शुक्ला ने बताया कि फिल्म में यह विस्तार से दिखाया गया है कि गौमाता किस प्रकार मानव जीवन के लिए आज भी अनिवार्य और लाभकारी है। यह फिल्म विशेष रूप से युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और यह समझाने की कोशिश करती है कि गौ-सेवा केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक जीवन शैली का हिस्सा है।
बदलता बॉलीवुड और सामाजिक संदेश
Lucknow फिल्म इंडस्ट्री में आ रहे बदलावों का जिक्र करते हुए शुक्ला ने कहा कि अब सिनेमा पारंपरिक कहानियों के दायरे से बाहर निकलकर सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर केंद्रित हो रहा है। ‘गोदान’ इसी बदलाव का एक सशक्त उदाहरण है। फिल्म में कई सत्य घटनाओं को शामिल किया गया है, जो इसकी पटकथा को अधिक प्रभावी और मार्मिक बनाती हैं। यह फिल्म संदेश देती है कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को अपनाने से ही सच्ची आत्मिक संतुष्टि प्राप्त होती है।
सत्ता और संत समाज का अभूतपूर्व समर्थन
Lucknow इस फिल्म को देशभर के प्रमुख राजनीतिक नेतृत्व और संतों का व्यापक सहयोग मिला है। शांतनु शुक्ला ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही, पूज्य संतों जैसे मुरारी बापू, प्रेमानंद जी महाराज और आचार्य प्रमोद कृष्णम का आशीर्वाद भी फिल्म को प्राप्त हुआ है, जो इसकी सफलता में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रहा है।





