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यहां मरे हुए भी पहुंचे मतदान केंद्र, कोरबा में खुली पोल !

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यहां मरे हुए भी पहुंचे मतदान केंद्र, कोरबा में खुली पोल!

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के परिणाम घोषित हो चुके हैं, लेकिन कुछ क्षेत्रों से शिकायतों का दौर अभी भी जारी है। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के ग्राम पंचायत कोनकोना से सामने आया है। यहां मतदान के दौरान मृत व्यक्तियों के नाम पर फर्जी वोट डाले जाने का आरोप लगा है। इस घटना ने न सिर्फ चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की सतर्कता को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।

यहां मरे हुए भी पहुंचे मतदान केंद्र, कोरबा में खुली पोल!

क्या है पूरा मामला?

कोनकोना ग्राम पंचायत के वार्ड में हुए पंच चुनाव के दौरान मतदान केंद्र क्रमांक 252 में दो ऐसे व्यक्तियों के नाम पर वोट डाले गए, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। शिकायतकर्ता पंच प्रत्याशी का कहना है कि इन मृतकों के नाम का दुरुपयोग कर फर्जी मतदान किया गया। हैरानी की बात यह है कि न तो मतदान कर्मियों ने और न ही प्रत्याशियों के एजेंटों ने इसकी जांच-पड़ताल की। परिणामस्वरूप, यह गंभीर अनियमितता सामने आई।

मृतकों के नाम

नीचे दी गई तालिका में उन व्यक्तियों के नाम और विवरण दिए गए हैं, जिनके नाम पर कथित तौर पर फर्जी वोट डाले गए:

नामपिता का नामस्थिति
कृष्ण गोपाल सोरीइतवार सोरीमृत (कई वर्ष पूर्व)
इतवार मरईअमरसाय मरईमृत (कई वर्ष पूर्व)

इन दोनों व्यक्तियों की मृत्यु कई साल पहले हो चुकी है, फिर भी उनके नाम मतदाता सूची में शामिल थे और उनके नाम पर वोट डाले गए।


शिकायत और मांग

25 फरवरी 2025 को पंच प्रत्याशी ने इस मामले को लेकर उपखंड मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज की। शिकायत में निम्नलिखित मांगें की गई हैं:

  1. जांच: फर्जी मतदान की घटना की गहन जांच की जाए।
  2. कार्रवाई: दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।

प्रत्याशी का कहना है कि मतदाता पहचान पत्रों का सही सत्यापन न होने और एजेंटों की लापरवाही के कारण यह गड़बड़ी हुई। अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि इस शिकायत का समाधान कैसे और कब तक होता है।


प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

इस घटना ने मतदान प्रक्रिया में कई खामियों को उजागर किया है:

  • मतदाता सूची में त्रुटि: मृत व्यक्तियों के नाम अब तक सूची से क्यों नहीं हटाए गए?
  • सत्यापन की कमी: मतदान केंद्र पर पहचान पत्रों की जांच में ढिलाई क्यों बरती गई?
  • एजेंटों की भूमिका: प्रत्याशियों के प्रतिनिधियों ने अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाई?

ये सवाल न केवल कोरबा जिले के लिए, बल्कि पूरे चुनावी तंत्र की विश्वसनीयता के लिए चिंता का विषय हैं।


आगे क्या?

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता से कदम उठाता है। क्या दोषियों को सजा मिलेगी? क्या मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा? इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में सामने आएगा।

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