दिल्ली धमाका जांच में NIA के साथ जम्मू-कश्मीर की पहली महिला IPS अधिकारी शाहिदा भी दिखीं
by: vijay nandan
नई दिल्ली: लाल किले के पास हुए ब्लास्ट केस में जांच की रफ्तार तेज हो गई है। एनआईए की टीम अब उन अधिकारियों से भी सलाह ले रही है, जिन्हें आतंकवाद से जुड़े मामलों में विशेष अनुभव रहा है। इन्हीं में से एक नाम है जम्मू-कश्मीर की पहली महिला आईपीएस अधिकारी और ‘लेडी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ शाहिदा परवीन गांगुली का। बुधवार को शाहिदा परवीन को धमाके वाली जगह पर देखा गया, जिसके बाद सवाल उठे कि क्या वे अब दिल्ली ब्लास्ट की जांच में अहम भूमिका निभाने वाली हैं?
#WATCH | Delhi: IPS officer Shahida Parveen Ganguly, former J&K ACP, arrives at the spot where a blast occurred in a Hyundai i20 car near the Red Fort on 10th November. Eight people died in the blast. pic.twitter.com/hNpI7AQIhB
— ANI (@ANI) November 12, 2025
कौन हैं शाहिदा परवीन गांगुली?
शाहिदा परवीन गांगुली, जम्मू-कश्मीर की वह अधिकारी हैं जिन्होंने 1990 और 2000 के दशक में आतंकवाद विरोधी अभियानों में अपनी बहादुरी से खास पहचान बनाई। वे 1997 बैच की IPS अधिकारी हैं और लंबे समय तक स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) में रहीं। इस यूनिट का काम आतंकियों के खिलाफ सीधे एक्शन लेना होता है। शाहिदा ने कई बड़े एनकाउंटर का नेतृत्व किया और अपने साहस के लिए उन्हें गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उनका जन्म जम्मू-कश्मीर के एक मुस्लिम परिवार में हुआ। शादी के बाद उन्होंने अपने बंगाली पति का सरनेम अपनाया और अब वे शाहिदा परवीन गांगुली के नाम से जानी जाती हैं। वे आज भी देशभर में “लेडी सिंघम” और “एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” के रूप में पहचानी जाती हैं।

आतंक के खिलाफ उनके प्रमुख अभियान
2000 के दशक में लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के कई नेटवर्क्स को ध्वस्त करने में अहम भूमिका।
2005 के बड़े आतंकी साजिश केस में मुख्य जांच अधिकारी के रूप में कार्य किया, जिसमें कई गिरफ्तारी हुईं।
बाद में क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) में रहते हुए कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच की।
महिलाओं के खिलाफ अपराध और साइबर क्राइम पर उन्होंने कई जागरूकता अभियान भी चलाए।
शाहिदा परवीन की निजी जिंदगी
शाहिदा की शादी एक बंगाली ब्राह्मण अधिकारी से हुई, जिसके बाद उनका सरनेम ‘गांगुली’ हो गया। वे दो बच्चों की मां हैं और वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर में रहती हैं। तनावपूर्ण सेवा के बीच वे योग और मेडिटेशन के जरिए खुद को संतुलित रखती हैं। हालांकि, उनके करियर के दौरान कुछ एनकाउंटरों को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने सवाल उठाए थे, लेकिन न्यायालय ने लगभग सभी मामलों में उन्हें क्लीन चिट दी।

दिल्ली ब्लास्ट केस में शाहिदा की भूमिका क्या होगी?
लाल किला धमाके की जांच में शाहिदा परवीन की विशेषज्ञता अहम साबित हो सकती है। इस केस में पुलवामा से जुड़े संदिग्ध डॉ. उमर नबी का नाम सामने आ चुका है। शाहिदा के पास जम्मू-कश्मीर के आतंकी मॉड्यूल्स की गहरी समझ है, जो एनआईए को जांच के तार जोड़ने में मदद कर सकती है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, शाहिदा फिलहाल किसी आधिकारिक जांच टीम का हिस्सा नहीं हैं। वे वर्तमान में सुरक्षा और आतंकवाद विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं और धमाके की सूचना मिलने पर व्यक्तिगत स्तर पर घटनास्थल का मुआयना करने पहुंचीं। वे अक्सर टीवी चैनलों और पॉडकास्ट्स पर आतंकवाद, सुरक्षा नीति और खुफिया ऑपरेशन्स पर अपनी विशेषज्ञ राय साझा करती हैं।
दिल्ली ब्लास्ट केस की गुत्थी सुलझाने में शाहिदा परवीन गांगुली जैसे अनुभवी अधिकारी का अनुभव बेहद मूल्यवान साबित हो सकता है। घाटी की यह बेटी, जिसने कभी आतंक के खिलाफ मोर्चा संभाला था, अब राजधानी में फिर एक बड़े मिशन के लिए मैदान में उतरती दिख रही है।





