जम्मू-कश्मीर के रामबन और रियासी जिलों में देर रात अचानक बादल फटने की भयावह घटना हुई। इस प्राकृतिक आपदा में कुल 7 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और कई लोग लापता हैं। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है ताकि लापता लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
रामबन में बादल फटने की घटना
- स्थान: राजगढ़ तहसील, गडग्राम
- घटना का समय: देर रात
- जान-माल का नुकसान: कम से कम 3 लोगों की मौत, 5 लोग लापता
- स्थिति: स्थानीय अधिकारी और बचाव दल मौके पर हैं। मलबे से शव निकालने और लापता लोगों की तलाश जारी है।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि रामबन के गडग्राम क्षेत्र में अचानक तेज बारिश और बादल फटने के कारण भूस्खलन हुआ। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी किया है।
रियासी में बादल फटने का मंजर
- स्थान: माहौर क्षेत्र, बद्दर गांव
- जान-माल का नुकसान: 7 लोगों की मौत
- प्रभाव: रात में परिवार सो रहा था, उनके घर पर मलबा गिर गया।
- राहत कार्य: स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद की और सभी शव बाहर निकाल दिए।
रियासी के स्थानीय विधायक मोहम्मद खुर्शीद ने बताया कि यह एक गरीब परिवार था। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को राहत और सहायता पहुंचाने के लिए तुरंत काम शुरू किया।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
- रामबन के उपायुक्त इलियास खान और वरिष्ठ अधिकारी रात 2 बजे घटनास्थल पर पहुंचे।
- प्रभावित लोगों को भोजन, मेडिकल सहायता और आश्रय प्रदान किया जा रहा है।
- प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और राहत कार्य के लिए हाई अलर्ट जारी किया है।
जम्मू-कश्मीर में हाल की बादल फटने की घटनाएं
जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ समय में बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं लगातार हो रही हैं। प्रमुख घटनाएं:
- किश्तवाड़: चोसिती गांव, मचैल माता तीर्थयात्रा मार्ग पर 15 अगस्त को बादल फटा। लगभग 60 लोगों की मौत, 50-220 लोग लापता, 100 से अधिक घायल।
- कठुआ और डोडा जिलों में भी भारी बारिश और बादल फटने की घटनाएं।
- भूस्खलन और बाढ़ की स्थिति कई जिलों में बनी हुई है।
रेस्क्यू ऑपरेशन और सुरक्षा उपाय
- प्रभावित इलाकों में नेशनल डिजास्टर रेस्पॉन्स फोर्स (NDRF) और स्थानीय पुलिस सक्रिय।
- लापता लोगों की खोज जारी, मलबे से शवों को सुरक्षित निकालने के प्रयास।
- प्रशासन ने स्थानीय लोगों से सावधानी और घरों से बाहर न निकलने की अपील की है।
रामबन और रियासी में बादल फटने की घटनाएं एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं की गंभीरता को दर्शाती हैं। प्रशासन और रेस्क्यू दल लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा और राहत प्राथमिकता है।