BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में वैश्विक शांति की उम्मीदों के साथ शुरू हुई अमेरिका और ईरान की वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई है। करीब 21 घंटे तक चली इस गहन चर्चा में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों जैसे अहम मुद्दों पर दोनों देशों के बीच गतिरोध बना रहा। ईरान ने इस विफलता के लिए सीधे तौर पर वाशिंगटन की ‘अत्यधिक और अनुचित’ मांगों को जिम्मेदार ठहराया है।

New Delhi 21 घंटे की मैराथन बैठक और विवाद के मुख्य बिंदु
ईरान के सरकारी मीडिया ब्रॉडकास्टर IRIB के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए चौबीसों घंटे बातचीत की, लेकिन अमेरिका के अड़ियल रुख के कारण कोई प्रगति नहीं हो सकी। वार्ता के दौरान निम्नलिखित पांच प्रमुख मुद्दों पर सबसे ज्यादा विवाद रहा:

- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग पर नियंत्रण और सुरक्षा।
- परमाणु अधिकार: ईरान के परमाणु कार्यक्रम की सीमाएं और अधिकार।
- प्रतिबंधों में राहत: ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की शर्तें।
- युद्ध की क्षतिपूर्ति: संघर्ष से हुए नुकसान की भरपाई की मांग।
- क्षेत्रीय सुरक्षा: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को पूरी तरह समाप्त करने पर मतभेद।
New Delhi ‘जो युद्ध से नहीं मिला, वो वार्ता से चाहते थे’— ईरान का कड़ा रुख
ईरान की समाचार एजेंसी ‘फ़ार्स’ ने सूत्रों के हवाले से दावा किया कि अमेरिकी टीम मेज पर उन लक्ष्यों को हासिल करना चाहती थी, जिन्हें वे युद्ध के मैदान में हासिल नहीं कर सके। तेहरान ने इन शर्तों को ‘महत्वाकांक्षी’ और ‘अतार्किक’ बताते हुए खारिज कर दिया। ईरान का मानना है कि अमेरिका की मांगें जमीनी हकीकत से परे थीं, जिसके कारण तेहरान द्वारा पेश की गई विभिन्न पहलों (Initiatives) का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला।

New Delhi सोशल मीडिया पर पुष्टि: जारी रहेगा संदेशों का आदान-प्रदान?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पुष्टि की है कि दोनों पक्ष किसी भी औपचारिक समझौते पर पहुंचने में विफल रहे। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 24 घंटों में कई महत्वपूर्ण संदेशों और टेक्स्ट का आदान-प्रदान हुआ है। बाक़ाई के अनुसार, बातचीत में प्रतिबंध हटाने और क्षेत्र के खिलाफ युद्ध की पूर्ण समाप्ति जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई, लेकिन अंततः ‘सहमति का अभाव’ ही भारी पड़ा।





