BY
Yoganand Shrivastava
दूषित पानी को बताया जीवन के अधिकार का उल्लंघन
Indore राष्ट्रीय हरित अधिकरण की सेंट्रल ज़ोन बेंच, भोपाल ने मध्य प्रदेश के कई शहरों में दूषित और सीवेज मिश्रित पेयजल की आपूर्ति को जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है। एनजीटी ने साफ कहा कि अशुद्ध पानी उपलब्ध कराना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। इस मामले में राज्य शासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी तय की गई है।

आईआईटी इंदौर और सीपीसीबी की संयुक्त समिति गठित
Indore मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने 6 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति में आईआईटी इंदौर के विशेषज्ञ, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, जल संसाधन विभाग और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल हैं। समिति को 6 सप्ताह में जमीनी स्थिति की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

शुद्ध जल आपूर्ति के लिए 14 कड़े दिशा-निर्देश जारी
Indore एनजीटी ने पूरे राज्य में सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए 14 सख्त निर्देश जारी किए हैं। इनमें जल गुणवत्ता की निगरानी के लिए एमआईएस और मोबाइल ऐप, पेयजल व सीवेज लाइनों की जीआईएस मैपिंग, टैंकों की नियमित सफाई, पाइपलाइन लीकेज सुधार, जल स्रोतों से अतिक्रमण हटाना, वर्षा जल संरक्षण, डेयरियों का विस्थापन, मूर्ति विसर्जन पर रोक और सभी कनेक्शनों पर मीटर लगाने जैसे निर्देश शामिल हैं। साथ ही जल संकट के समय टैंकर आपूर्ति की पूर्व योजना बनाने के भी आदेश दिए गए हैं।
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