Report: Rupesh kumar dass
Hazaribagh खाड़ी देश दुबई में विपरीत परिस्थितियों और शोषण का शिकार हुए झारखंड के 14 प्रवासी मजदूरों में से 11 मजदूर बुधवार को सुरक्षित भारत लौट आए। महीनों तक बिना वेतन और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में संघर्ष करने के बाद, जैसे ही इन मजदूरों ने भारतीय धरती पर कदम रखा, उनके चेहरों पर सुकून और आंखों में घर वापसी की खुशी साफ नजर आई।
कंपनी के शोषण और अभावों की दर्दनाक दास्तां
Hazaribagh ये सभी मजदूर अक्टूबर 2025 में एक निजी कंपनी (EMC) के जरिए ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के काम के लिए दुबई गए थे। मजदूरों का आरोप है कि वहां कंपनी ने उनसे निर्धारित समय से ज्यादा काम कराया, लेकिन वेतन देने के नाम पर हाथ खड़े कर दिए। महीनों तक भुगतान न मिलने के कारण मजदूरों के पास खाने-पीने और रहने तक के पैसे नहीं बचे थे। विवश होकर मजदूरों ने सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश साझा कर अपनी व्यथा सुनाई थी और सरकार से रेस्क्यू की अपील की थी।
सरकार और समाजसेवियों की सक्रियता से मिली आजादी
Hazaribagh मजदूरों की पुकार सुनकर झारखंड और केंद्र सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर समन्वय किया, जिसके परिणामस्वरूप उनकी वापसी संभव हो सकी। कोलकाता एयरपोर्ट पर मजदूरों का स्वागत करने पहुंचे समाजसेवी सिकंदर अली ने उन्हें सुरक्षित बस के जरिए हावड़ा स्टेशन भेजा, जहां से वे अपने पैतृक जिलों गिरिडीह, बोकारो और हजारीबाग के लिए रवाना हुए। परिजनों ने इस संकट की घड़ी में साथ देने के लिए सरकार, मीडिया और समाजसेवी संगठनों का आभार व्यक्त किया है।
‘हुनर है पर अवसर नहीं’: मजदूरों ने उठाई रोजगार की मांग
Hazaribagh घर लौटने के बाद मजदूरों का दर्द भी छलक पड़ा। उन्होंने कहा कि विदेशों में उन्हें कड़ी मेहनत के बावजूद अपमानजनक स्थितियों में रहना पड़ता है। मजदूरों ने सरकार से मांग की कि यदि उनके हुनर के अनुरूप प्रदेश या देश में ही उचित मजदूरी और रोजगार की व्यवस्था हो जाए, तो किसी भी मजदूर को मजबूरी में सात समंदर पार जान जोखिम में डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। फिलहाल, शेष 3 मजदूरों को भी वापस लाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
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