BY: Yoganand Shrivastva
Gwalior news: ग्वालियर में आगरा–मुंबई नेशनल हाईवे पर चीता शावक KGP-4 की मौत के मामले में वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। करीब सात दिन की जांच के बाद उस कार का पता लगा लिया गया है, जिसने चीते को टक्कर मारी थी। जांच में सामने आया है कि संबंधित वाहन ग्वालियर का है और एसएएफ में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल स्वर्ण सिंह जादौन के नाम पर पंजीकृत है।
वन विभाग ने शुक्रवार को कार को जब्त कर लिया, जिसकी जानकारी शनिवार को सार्वजनिक की गई। फोरेंसिक जांच के दौरान कार के बंपर में फंसे चीते के मुंह के बाल मिले, जो हादसे के समय हेडलाइट के नीचे चिपक गए थे। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर वाहन की पुष्टि की गई।
जांच में CCTV कैमरों की एक कड़ी तैयार की गई। घटनास्थल के आसपास लगे कैमरों की फुटेज खंगालने पर सफेद रंग की ब्रेजा कार, क्रमांक MP07 CJ 3937, घटना के समय हाईवे पर नजर आई। इसके बाद वाहन तक पहुंचकर उसकी बारीकी से जांच की गई, जिसमें बंपर पर डेंट और फोरेंसिक साक्ष्य मिले।
मामले में हेड कॉन्स्टेबल स्वर्ण सिंह जादौन ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले उनकी कार एक दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने वाहन कंपनी को वापस कर दिया था और इसके बदले उन्हें मुआवजे की राशि मिली थी। उनका कहना है कि उसी समय वाहन किसी अन्य व्यक्ति के नाम ट्रांसफर किया गया था, हालांकि आरटीओ रिकॉर्ड में अब भी गाड़ी उनके नाम दर्ज है। फिलहाल वाहन कौन चला रहा था, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
ग्वालियर डीएफओ अंकित पांडे के अनुसार, वाहन और चालक को राउंडअप कर लिया गया है। कार की फोरेंसिक जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। चालक से दोबारा पूछताछ भी की जाएगी।
गौरतलब है कि यह हादसा एक सप्ताह पहले घाटीगांव थाना क्षेत्र के सिमरिया मोड़ के पास हुआ था। उस समय कूनो नेशनल पार्क से भटके दो चीता शावक सड़क पार कर रहे थे, तभी तेज रफ्तार कार ने नर शावक KGP-4 को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका भाई सुरक्षित बच गया। घटना के समय वन विभाग की टीम सैटेलाइट कॉलर के जरिए शावकों पर नजर बनाए हुए थी।





