BY: Yoganand Shrivastava
Gwalior news: ग्वालियर में आयोजित 101वें तानसेन समारोह में देश की प्रख्यात शास्त्रीय गायिका पद्मश्री सुमित्रा गुहा ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इस अवसर पर उन्होंने शास्त्रीय संगीत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह हमारी सांस्कृतिक जड़ों का आधार है और प्रत्येक बच्चे को इसकी मूलभूत शिक्षा अवश्य लेनी चाहिए।
विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि वह लगभग 14–15 वर्षों के अंतराल के बाद ग्वालियर पहुंची हैं। यहां आकर उन्हें गहरी संतुष्टि और आत्मिक शांति की अनुभूति हुई। ग्वालियर आगमन के बाद उन्होंने सबसे पहले संगीत सम्राट तानसेन की समाधि पर पहुंचकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए और इसी भाव के साथ समारोह में सहभागिता की।
पद्मश्री गुहा ने ग्वालियर को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध शहर बताया। उन्होंने कहा कि तानसेन की समाधि संगीत साधकों के लिए प्रेरणा का केंद्र है और यहां की सांस्कृतिक परंपराएं आज भी जीवंत हैं। मध्य प्रदेश के लोगों की आत्मीयता और संस्कार उन्हें विशेष रूप से आकर्षित करते हैं।
उन्होंने यह भी साझा किया कि मध्य प्रदेश में संस्कृति, संगीत और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। उज्जैन में महाकाल की नगरी में पूर्व प्रस्तुतियों की स्मृतियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रदेश कलाकारों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।
गौरतलब है कि कर्नाटक और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में समान रूप से दक्ष सुमित्रा गुहा को वर्ष 2010 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया था। 101वें तानसेन समारोह में उनकी प्रस्तुति को लेकर संगीत प्रेमियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।





