Gold-Silver Import Price Update : नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के आयात से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने दोनों की बेस इंपोर्ट वैल्यू (टैरिफ वैल्यू) में कटौती की है, जिससे आयातकों और ज्वेलर्स की लागत में कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में सोना-चांदी तुरंत सस्ते हो जाएंगे।
Gold-Silver Import Price Update : क्या बदली है नई दर?
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सोने की बेस इंपोर्ट वैल्यू 80 डॉलर घटाकर 1,343 डॉलर प्रति 10 ग्राम कर दी गई है। वहीं चांदी की बेस इंपोर्ट वैल्यू 276 डॉलर कम होकर 2,092 डॉलर प्रति किलोग्राम हो गई है। नई दरें 12 जून 2026 से लागू हो गई हैं।
Gold-Silver Import Price Update : बेस इंपोर्ट प्राइस क्या होता है?
बेस इंपोर्ट प्राइस या टैरिफ वैल्यू वह सरकारी निर्धारित मूल्य होता है, जिसके आधार पर आयातित वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी की गणना की जाती है। यह बाजार में चल रही वास्तविक कीमत नहीं होती, बल्कि कर निर्धारण के लिए तय की गई एक संदर्भ कीमत होती है।
जब कोई कारोबारी विदेश से सोना या चांदी आयात करता है, तो उस पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी इसी वैल्यू के आधार पर तय होती है।
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Gold-Silver Import Price Update :सरकार इसे क्यों तय करती है?
सरकार का उद्देश्य आयात प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और टैक्स चोरी की संभावनाओं को रोकना है। यदि यह व्यवस्था न हो तो कुछ आयातक कम कीमत दिखाकर कम कर चुकाने की कोशिश कर सकते हैं।
कौन तय करता है टैरिफ वैल्यू?
बेस इंपोर्ट प्राइस तय करने का अधिकार CBIC के पास है। कस्टम्स एक्ट, 1962 की धारा 14(2) के तहत बोर्ड समय-समय पर अधिसूचना जारी कर टैरिफ वैल्यू में संशोधन करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति को देखते हुए इसकी नियमित समीक्षा की जाती है।
Gold-Silver Import Price Update : किन आधारों पर तय होती है कीमत?
टैरिफ वैल्यू निर्धारित करते समय कई पहलुओं का अध्ययन किया जाता है, जिनमें शामिल हैं—
Gold-Silver Import Price Update :वैश्विक बाजार में सोने-चांदी की कीमतें
डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति
आयात की मात्रा और रुझान
अंडर-इनवॉइसिंग की आशंका
तस्करी रोकने की जरूरत
कस्टम ड्यूटी संग्रह की पारदर्शिता
क्या इससे सोना-चांदी सस्ते होंगे?
इस सवाल का जवाब सीधा ‘हां’ नहीं है। बेस इंपोर्ट प्राइस में कमी आने से आयातकों की टैक्स देनदारी कुछ कम हो सकती है, जिससे उनकी कुल लागत घटती है। लेकिन खुदरा बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कई अन्य कारकों से भी प्रभावित होती हैं।
Gold-Silver Import Price Update : इनमें शामिल हैं—
अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव
डॉलर-रुपया विनिमय दर
कस्टम ड्यूटी और GST
ज्वेलर्स का मार्जिन
मेकिंग चार्ज
घरेलू मांग और आपूर्ति
इसी वजह से टैरिफ वैल्यू घटने के बावजूद उपभोक्ताओं को तुरंत कीमतों में बड़ी राहत मिलना जरूरी नहीं है।
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Gold-Silver Import Price Update : एक उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी आयातक ने 10 ग्राम सोना विदेश से खरीदा। पहले यदि ड्यूटी की गणना 1,423 डॉलर की वैल्यू पर होती थी और अब यह 1,343 डॉलर पर होगी, तो स्वाभाविक रूप से कर की राशि कम होगी। इससे आयातक की लागत घट सकती है, लेकिन खुदरा बाजार तक इसका पूरा लाभ पहुंचेगा या नहीं, यह कई अन्य कारकों पर निर्भर करेगा।
Gold-Silver Import Price Update : आम उपभोक्ता के लिए क्या मायने?
सरकार ने सोने या चांदी की बाजार कीमत में सीधे कोई कटौती नहीं की है। बदलाव केवल उस सरकारी मूल्य में हुआ है, जिसके आधार पर आयात के समय टैक्स की गणना की जाती है। इससे आयातकों और ज्वेलर्स को कुछ राहत मिल सकती है और भविष्य में कीमतों पर सीमित असर देखने को मिल सकता है।
बेस इंपोर्ट प्राइस और बाजार भाव दो अलग-अलग चीजें हैं। सरकार ने केवल टैक्स निर्धारण के लिए इस्तेमाल होने वाली वैल्यू में संशोधन किया है। इसलिए यदि आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह मानकर न चलें कि कीमतें तुरंत उसी अनुपात में घट जाएंगी। बाजार भाव पर अंतिम असर कई आर्थिक और वैश्विक कारकों के संयुक्त प्रभाव से तय होगा।

