Report: Vijay Tiwari
रीवा: संजय गांधी अस्पताल से इस बार जो तस्वीर सामने आई है, उसने न सिर्फ शहर बल्कि पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मां अपने मासूम बच्चे की जान बचाने के लिए अस्पताल पहुंची थी, लेकिन वहीं वह इंसानियत के कत्ल की गवाह बन गई। मामूली विवाद — जी हां, सिर्फ सिक्योरिटी गार्ड से मामूली विवाद — और उसके बाद हुआ अमानवीय व्यवहार। आईसीयू वार्ड में जिंदगी और मौत से जूझ रहे उस बच्चे को डॉक्टरों ने वार्ड से बाहर निकाल दिया, सिर्फ इसलिए क्योंकि उसकी मां ने अस्पताल की मनमानी के खिलाफ आवाज़ उठाई थी। मां रो-रोकर, हाथ जोड़कर डॉक्टरों के पैरों में गिरती रही, लेकिन किसी का दिल नहीं पिघला।
“धरती के भगवान” कहे जाने वाले डॉक्टरों ने दरिंदगी की हदें पार कर दीं — मां और उसके गंभीर रूप से बीमार बच्चे को अस्पताल से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया। अस्पताल के गेट पर वह मां अपने बच्चे को सीने से लगाकर फूट-फूटकर रोती रही —
“मेरे बच्चे को बचा लो… मैं हाथ जोड़ती हूं… उसे मरने मत दो…”
लेकिन वहां मौजूद गार्ड, स्टाफ, और डॉक्टर सब पत्थर बने खड़े रहे। जब मीडिया के कैमरे पहुंचे, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में बच्चे को दोबारा भर्ती किया गया।





