BY
Yoganand Shrivastava
Delhi पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान और अन्य संघर्षों के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। जहाँ एक ओर युद्ध के खर्च और तनाव ने दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका की आर्थिक कमर तोड़ दी है, वहीं दूसरी ओर भारतीय अर्थव्यवस्था इन चुनौतियों के बीच एक ‘ब्राइट स्पॉट’ बनकर उभरी है। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) की ताजा रिपोर्ट ने भारत के लिए खुशियों की नई लहर पैदा कर दी है।

Delhi अमेरिका की इकोनॉमी पर युद्ध की मार, विकास दर में भारी गिरावट
ईरान के साथ जारी तनाव और पश्चिम एशिया में अस्थिरता का सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 की अंतिम तिमाही में अमेरिका की जीडीपी वृद्धि दर गिरकर महज 0.5% रह गई है। अगर पूरे साल 2025 के प्रदर्शन को देखें, तो यह 2.1% रहा है, जो पिछले सालों (2.8% और 2.9%) की तुलना में बड़ी गिरावट को दर्शाता है। रक्षा खर्च में बढ़ोतरी और सप्लाई चेन में बाधा ने सुपरपावर को पस्त कर दिया है।

Delhi भारत के लिए ‘गुड न्यूज’: ADB ने बढ़ाया ग्रोथ अनुमान
एक तरफ जहाँ अमेरिका संघर्ष कर रहा है, वहीं अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत की मजबूती पर मुहर लगा रही हैं। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को बढ़ाकर 6.9% कर दिया है। इससे पहले वर्ल्ड बैंक भी भारत की ताकत को देखते हुए 7.6% की विकास दर का अनुमान लगा चुका है। भारत की इस रफ्तार के पीछे मजबूत घरेलू मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च और बेहतर वित्तीय सुधार मुख्य कारण हैं।

Delhi भविष्य के संकेत और संभावित चुनौतियां
ADB ने न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य के लिए भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.3% रहने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, रिपोर्ट में कुछ सावधानियां भी बरतने को कहा गया है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा है। इसके बावजूद, यूरोपीय संघ (EU) के साथ संभावित व्यापार समझौतों और निजी निवेश में बढ़ोत्तरी के चलते भारत का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।
Read this: Bhopal municipal corporation: क्षेत्रीय विकास मेरी पहली प्राथमिकता- नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी





