Edit by: Priyanshi Soni
Ghooskhor Pandat: आजकल बॉलीवुड में फिल्म की कहानी जितनी अहम नहीं रह गई है, उससे कहीं ज्यादा अहम हो गया है, फिल्म का रिलीज से पहले का माहौल। कई निर्माता-निर्देशक जानबूझकर ऐसा टाइटल, पोस्टर या दृश्य चुनते हैं जिससे विवाद पैदा हो, सोशल मीडिया पर बहस छिड़े और फिल्म बिना बड़े प्रचार खर्च के ही सुर्खियों में आ जाए। विरोध बढ़ने पर बाद में नाम बदल दिया जाता है, लेकिन तब तक फिल्म पब्लिक की नजर में आ चुकी होती है।
Ghooskhor Pandat: वेब सीरीज पर हुआ विवाद
इसे फिल्म इंडस्ट्री में “विवाद मार्केटिंग” या “नेगेटिव पब्लिसिटी स्ट्रैटेजी” कहा जाने लगा है। हाल ही में, एक उदाहरण Ghooskhor Pandat वेब सीरीज का है। इसका टीजर रिलीज होते ही विवाद शुरू हो गया और सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। विवाद बढ़ने के बाद नेटफ्लिक्स ने तुरंत टीजर को हटा दिया, लेकिन इसके बावजूद यह वायरल हो चुका था।
Ghooskhor Pandat: विवाद क्यों बन गया मार्केटिंग हथियार?
इस मुद्दे पर फिल्म व्यापार से जुड़े जानकार कहते है, निर्माता अक्सर विवाद को रणनीति के तौर पर अपनाते हैं क्योंकि इससे उन्हें कई फायदे मिलते हैं। सबसे पहले, मीडिया में मुफ्त कवरेज मिलता है और टीवी डिबेट्स तथा सोशल मीडिया पर फिल्म चर्चा का केंद्र बन जाती है। इससे दर्शकों में जिज्ञासा पैदा होती है और फिल्म का नाम रिलीज़ से पहले ही घर-घर पहुंच जाता है। साथ ही, इस तरह की पब्लिसिटी से प्रमोशन पर होने वाला खर्च भी काफी कम हो जाता है, जिससे निर्माता कम निवेश में अधिक चर्चा और दर्शक ध्यान हासिल कर लेते हैं।
Ghooskhor Pandat: चर्चा में आईं कई फिल्में
पिछले एक दशक में कई फिल्मों ने विवादों को मात देते हुए अपने टाइटल या कंटेंट में बदलाव किए। उदाहरण के तौर पर, लक्ष्मी बम को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने के आरोपों के बाद लक्ष्मी में बदला गया (2020)। पद्मावती (2018) को करणी सेना के उग्र विरोध और हिंसक घटनाओं के बाद पद्मावत में संशोधित किया गया। इसी तरह, लवरात्रि (2018) को ‘नवरात्रि’ से मिलते-जुलते नाम के कारण बदलकर लवयात्री किया गया और रामलीला (2013) का टाइटल धार्मिक भावनाओं से जुड़े विवाद के चलते गोलियों की रासलीला: राम–लीला कर दिया गया।

Ghooskhor Pandat: अन्य बड़ी फिल्में
अन्य बड़े उदाहरणों में बॉम्बे वेलवेट (2015) शामिल है, जिसकी शुरुआती थीम और टाइटल विवादों के चलते बदलने पड़े। शुद्धि को वर्षों तक विवाद, कास्ट बदलाव और देरी के बाद कलंक (2019) के रूप में रिलीज़ किया गया। इंसानियत के दुश्मन को शुरुआती विवाद के कारण वांटेड (2009) में बदला गया।
हाल की फिल्मों और वेब सीरीज में भी बदलाव देखने को मिले, जैसे राधे: योर मोस्ट वांटेड भाई (2021) और तांडव (2021), जहां कंटेंट और धार्मिक भावनाओं को लेकर विवाद के बाद माफी और बदलाव किए गए। इसी तरह, आदिपुरुष (2023) का टीजर रिलीज़ होते ही भारी विरोध हुआ, जिसके बाद VFX और संवादों में संशोधन किया गया।
बॉलीवुड में नाम बदलने और विवाद खड़ा करने की यह परंपरा आगे भी जारी रह सकती है। जब तक इससे मुफ्त प्रचार मिलता रहेगा, निर्माता इसे ‘रणनीति’ के तौर पर अपनाते रहेंगे। हालांकि, अंत में फैसला दर्शक ही करेगा कि फिल्म चलेगी या नहीं।
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